भारतीय ज्‍योतिष के इस परम्‍परागत प्रयोग पर मैं निरंतर कार्यरत हूं आशा है आप भी इससे लाभ प्राप्‍त करेंगे

Wednesday, January 14, 2009

सूचना रत्न धारण केम्प रायपुर & नागपुर

रायपुर
दिनांक २१/०१/२००९ दिनांक २३/०१/२००९
संपर्क - भाईजी प्लाईवुड , स्टेशन चौक के पास , रायपुर सी.जी (इंडिया)
फ़ोन ०९८२७१६५०५५ ०७८८३२९२५८०
नागपुर
दिनांक 04/०२/२००९ फरवरी से 06/02/२००९
संपर्क - जय कूलर्स,सेंटरल एवेनु रोड , आंबेडकर चौक नागपुर - ८ (इंडिया)
फ़ोन ०९८२७१६५०५५ 07883292580


Sunday, September 14, 2008

समान राशि पर समान रत्न धारण अनुचित

एक ही राशि के संसार में जितने भी व्यक्ति हैं, वे बच्चे कुमार,युवा एवं वृद्ध तथा स्त्री या पुरूष ही क्यों न हो सबके ग्रहों की स्थिति एक ही प्रकार की नहीं होती। एक ही राशि के प्रत्येक व्यक्ति की ग्रहों की स्थिति के अनुसार उन व्यक्तियों की स्थिति एवं परिस्थितियों में भिन्नता होती हैं। एक ही राशि के सभी व्यक्तियों के लिए शनि ढइया हो या साड़ेसाती हो, खराब नहीं होती। किसी के लिए खराब होती है, तो किसी के लिए मध्यम खराब होती है, तो किसी के लिए बहुत खराब होती हैं, ठीक इसी प्रकार किसी के लिए थोड़ी ठीक होती है, तो किसी के लिए मध्यम ठीक होती है, तो किसी के लिए बहुत ठीक होती है। उदाहरण के लिए शनि ग्रह को लिया गया है क्योंकि जब किसी पर कष्ट आता है तब उसे ऐसा महसूस होता है कि उसे शनि ही परेशान कर रहा है क्योंकि शनि के प्रति इस प्रकार की धारण आम व्यक्ति के मन में बनी है, जबकि ऐसा नहीं है। शनि ग्रह देने वालों को क्या-क्या नहीं देते दुनिया के सुख ठाट-बाट, राजपाट आदि शान शौहरत व्यवसाय एवं उद्योग आदि सभी देते हैं। इतना सब कुछ देने के बाद भी शनि के प्रति अच्छी धारणा अधिकतर व्यक्तियों के मन में नहीं होती। शनि का नाम बदनाम की श्रेणी में अधिक है,जो कि अनुचित है। शनि के अलावा अन्य कुछ ग्रह और भी हैं जो मनुष्य को अनेकों प्रकार के कष्ट या अनेकों प्रकार की सुख संपदा दे सकते हैं।
जिनकी कुण्डली है उसमें इन सभी की स्थिति भली-भांति देखी जा सकती है जिनकी कण्डली नहीं है उनकी हस्तरेखा से भी ग्रहों की स्थिति देखी जा सकती है और एकदम सहीं स्थिति दिव्य रूद्राक्ष से जांच करके देखी जा सकती है। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच दुर्लभ जैसी है।
अत: एक ही राशि के व्यक्ति के लिए की गई आम घोषणा या व्यापारिक विज्ञापन या फलित राशि फल के अनुसार रत्न को धारण करना अनुचित होगा। रत्न धारण के पूर्व विद्ववानों से परामर्श लेकर ही रत्न धारण करना चाहिए। जिस व्यक्ति की कुण्डली नहीं हैं, उन्हें तो विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। हर किसी के कह देने से कोई रत्न धारण नहीं करना चाहिए। हमारा कहना है कि धारक अपनी सुझ-बुझ से ही समझ कर यदि रत्न धारण करें तो ही उचित फल प्राप्त कर सकता है नहीं तो करोड़पति के बजाए रोड़पति भी बन सकता है, एक ही राशि के कई व्यक्तियों की एक ही दिन में या एक सप्ताह में दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच की गई और उन्हें अलग-अलग रत्न धारण कराये गये और परिणाम स्वरूप सभी के रिजल्ट पाजेटिव प्राप्त हुयें। यह जांच प्रेक्टिकल हैं, कोई मनगढ़त कहानी नहीं है। इस जांच के माध्यम से धारण कराये गये रत्नों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता यह ९९ प्रतिशत सफल जांच है तथा परिणाम भी सफल है।

Saturday, September 6, 2008

व्यापार में तरक्की एवं कर्ज मुक्ति में सुधार

सिर्फ एक माह में

आदरणीय अग्रवाल जी के पास लगभग एक माह पूर्व आया था। परेशानी भी व्यापारिक और व्यवहारिक दोनों ही तरह की।
व्यापार में सपोर्ट नहीं मिल रहा था और घरेलू माहोल अशांत था। सच कहूं तो आत्महत्या को मन बनने लगा था। पुराने गड़े मुर्दे उखड़ने लगे थे। लोग यह जानते हुये भी कि कुछ भी नहीं है, परेशान करते थे।
आज लगभग-१माह से आदरणीय अग्रवाल जी से परामर्श लेने के बाद सुधार होने लगा। व्यापार में लोगों का सपोर्ट मिलने लगा। पारिवारिक स्थिति में भी शांति एवं सुधार है। अन्दर से थोड़ी स्टेमना
भी महसूस कर रहा हूँ।
आदरणीय अग्रवाल जी, हृद्य से बारम्बार आपको सादर धन्यवाद। आपको सादर नमन करता हूँ ।
रानीदान भूतडा
३/६ ऋषभ नगर,
दुर्ग
९३०२८३४०२८

Sunday, August 17, 2008

ताबिज भी निष्क्रीय करते हैं रत्नों के प्रभाव को

ताबिज भी सोच समक्ष कर विश्वनीय व्यक्ति के परामर्श से धारण करना चाहिए। जनरल लोग सुरक्षा कवच के इरादे से ताबिज धारण कर लेतें हैं और धारण उपरान्त उसकी प्रतिक्रिया पर ध्यान नहीं देते जब धीरे-धीरे कुछ तकलीफ होती है, चाहे वो किसी भी प्रकार की हों, होने लगती है तो वे अपने मन में सोचते हैं कि मैंने ताबिज पहन रखा है मेरी रक्षा अवश्य होगी, जबकि तकलीफ का दाता ताबिज ही रहता है। इसका मतलब ये भी नहीं है कि सभी ताबिज से नुकसान होता है और वे खतरनाक होते हैं। दोनों प्रकार की स्थिति रहती है। कुछ ताबिज तो इतने प्रभावकारी होते हैं, कि व्यक्ति का ग्रहों के कारण उत्पन्न तकलीफ को दूर करने के लिए धारण कराये गये उचित एवं अनुकूल रत्न के प्रभाव को निष्क्रीय करते हैं। इसी स्थिति में ताबिज उतारने के बाद एक ही रात में दुष्प्रभाव समाप्त हो जाता है तथा रत्न का अनुकूल प्रभाव महसूस होने लगता है। ऐसा दिव्य रूद्राक्ष जांच से अनेकों व्यक्ति में देखा जा चुका है।
जैसे दस वर्ष के एक विद्यार्थी का ही उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, जांच कराने आया तब लोहे का कड़ा हाथ में,दो ताबिज गले में,एक ताबें का रिंग हाथ में धारण किया था, जिसे रूद्राक्ष जांच में प्रतिकूल पाया गया उसे उतारकर ओनेक्स धारण करने को कहा गया। लड़के की समस्या थी कि उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता था तथा घर वालों पर बहुत गुस्सा करता था।
ओनेक्स धारण करने के बाद बाकी सब उतार दिया था, दो ताबिज में से एक ताबिज को ओनेक्स रिंग के साथ धारण कर लिया था।....... हुआ ये कि उसका क्रोध और बढ़ गया तथा किसी भी स्थिति में सुधार नहीं आया। एक सप्ताह बाद जब वह दुबारा आया तब फिर से जांच की गई और ताबिज उतार दिया गया... तब दूसरे दिन उसके घर से सूचना मिली कि अब ठीक लगने लगा है।
कहने का तात्पर्य है कि ताबिज हो या रत्न कुछ भी धारण करना हो तो विद्ववानों के परामर्श से ही करना चाहिये, अपने मन से या नीम-हकीमों के कहने से नहीं करना चाहिये।

Saturday, July 26, 2008

नेचर में परिवर्तन भी होता है

मैंने पहली बार ये रत्न अग्रवाल अंकल जी से रूद्राक्ष जांच के बाद पहना है, उससे पहले कुछ भी अपनी इच्छा से पहन लिया करती थी। पर मुझे गुस्सा ,चिड़चिड़ापन महसूस होता था। पर जब से अंकल जी के राय से रत्न धारण किया है, तब से मुझे बहुत हल्का महसूस होता है। या ऐसा कह सकती हूँ कि मैंने अपना खुद का दिमाक शांत पाया है। गुस्सा कम हो गया, परेशानी नहीं होती।
तो ऐसा कह सकती हूँ ,कि इसे धारण करने के बाद मैं खुद बहुत बदलाव महसूस कर रही हूँ । और इसका असर मैं उसी दिन से महसूस करने लगी जब इसे पहना।

शालिनी सिन्हा
२० /१० राधिका नगर सुपेला ,भिलाई
मोबाइल नंबर ९३००१०७२०७

Saturday, July 19, 2008

Wednesday, June 25, 2008

माहिलाएं गहने जानकारी ले कर ही पहनें

अधिकर महिलाओं को श्रृंगार प्रिय होता है, और अधिकतर महिलाओं में ये भावना होती है कि हम किसी से कम नहीं। श्रृंगार करना बहुत अच्छी बात है, श्रृंगार से तो महिलाएं सुशोभित होती है, परन्तु इस बात को ध्यान में रखतें हुए श्रृंगार करें तो उन्हें बहुत सी मुशीबतों का सामना नहीं करना पडेग़ा जैसे:- पति पत्नी के बीच तनाव ,मानसिक तनाव,चिड़चिड़ा पन ,शारिरिक कष्ट आदि से बचाव हो सकता है। वो बात ये है कि महिलाएं अपने श्रृंगार के लिए उपयोग में लाने वाले गहने अपनी राशि के अनुसार ही पहने । अपनी राशि के अनुसार वे कौन-कौन सा रत्न पहन सकती हैं इस बात की जानकारी लेकर सकती हैं इस बात की जानकारी लेकर पहने, तो अनेकानेक अपनी अपनी एवं अपने परिवार के लिए उत्पन्न समस्याओं से बचाव कर सकती हैं।
इसके बाद बारी आती है कि हम किसी से कम नहीं,यह बहुत अच्छी बात है परन्तु कुछ क्षेत्र में ये घातक भी होती है जैसे किसी के लिए हीरा पहनना मारक की स्तिथि उत्पन्न करता है हीरे पहनने की वजह से स्वास्थ में खराबी आना या अन्य कोई परेशानी उत्पन्न होना,ये तो उसके लिए घातक ही होती है। इस लिए ऐसी महिला को लगातार हीरा नहीं पहनना चाहिये। बहुत शान शौकत का यदि प्रदर्शन ही करना हो तो कार्यक्रम होने तक ही पहन कर तुरंत खोल दे , परन्तु कुछेक प्रतिशत को ये स्थिति भी घातक हो सकती है। अत: ये समझ लें कि हर रत्न उपरत्न में अच्छा या बुरा करने की ताकत होती है। सौंदर्यता के लिए भी धारण किये गये रत्न परामर्श से ही धारण करना उचित होता है।
सिर्फ सोना चांदी ही एक ऐसी धातु (मेटल) है जिसे पहनने पर हजारों में एक व्यक्ति को सूट नहीं करता। इसके अलावा अन्य मेटल से बने गहने अधिकतर लोगो को सूट नहीं करता जिसे धारक अहसास के आभाव में समझ नहीं पाता। अत: अन्य धातुओं से बने गहने भी नुकसान दायक हो सकते है।

Tuesday, June 3, 2008

दिव्य रूद्राक्ष जांच की विशेषता

इस जांच का आधार ज्योतिषिय है :- किसी भी रत्न धारण जातक को रत्न धारण कराये जाने के समय इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि, धारण कराने वाले रत्न से धारण को किसी एक क्षेत्र में तो लाभ भरपूर मिल रहा है और दूसरे अन्य कई प्रकार से हानि हो रही है ऐसा ना हो इस बात का पूरा ध्यान रखते हुए ही रत्न धारण कराया जाता है। धारक को संपूर्ण क्षेत्र में लाभ पूरा मिले किसी भी क्षेत्र में धारण किये गये रत्न का कोई साइड इफेक्ट नहीं हो। इस जांच विधि से यह देखना आसान होता है। सभी ग्रहों का संतुलन धारक जारक के अनुसार सेट किया जाता है। इस प्रकार की सैटिंग से ९८: पाजेटिव (सकारात्मक) प्रभाव त्वरित (शीघ्र) मिलने लगता है। उक्त प्रभाव धारक जातक के लिए काफी संतोश जनक होता है। धारक जातक जिस ग्रूप का होता है, उसके ग्रहों को उसी ग्रूप के रत्नों से सैट किया जाता है। इस जांच के द्वारा जातक धारक के ग्रहों को कितने कम से कम वनज के रत्नों से ताकतवर बनाया जा सकता है जिससे धारक जातक को पूर्ण लाभ मिले सके ,यह देख कर ही रत्नों का वजन तय किया जाता है।
निर्धारित वजन से अधिक वजन के रत्न धारण से या तो लाभ शुन्य हो सकता है, या फिर कम हो सकता है,या फिर कुछ केश में हल्का सा नुकसान होना भी देखा गया है।
सबसे विशेष बात तो यह है कि जिन लोंगो की कुण्डली नहीं होंती ,कुण्डली नहीं होने के कारण यह सही पता नहीं चल पाता है कि , उक्त व्यक्ति का जन्म किस नक्षत्र में हुआ है और अभी कौन सी महादशा में किसका अंतर प्रत्यंतर दशा चल रही है। इन सभी का आभाव होते हुए भी रूद्राक्ष जांच से जिस रत्न की जानकारी प्राप्त होती है उस रत्न के धारण किये जाने वाले जातकों में लगभग ९८: लोंगों को लाभान्वित होते देखा गया है।
इस जांच से धारण करने वाले व्यक्ति को क्या पहनना चाहिये अथवा क्या नहीं पहनना चाहिये जिससे उसे लाभ होगा की जानकारी भी प्राप्त होती है।
इस जांच से व्यक्ति की अनेकों समस्या का समाधान रत्न ,उपरत्न तथा धातु के धारण से संभव है जैसे :- पति पत्नी विवाद ,मानसिक तनाव ,कार्य में असफल होना ,पढ़ाई में मन नहीं लगना ,दुर्भाग्य ,तांत्रिक क्रियाओं से पीड़ित, विवाह में रूकावट ,संतान में रूकावट ,पुरूषार्थ में कमी ,ग्रहों की गड़बड़ी से उत्पन्न बीमारी ,आदि अनेको समस्या का समाधान होता है ।
इस जांच से हर प्रकार के रत्नों का पावर भी देखा जा सकता है, किसी भी रत्न या उपरान्त में शक्ति है या नहीं यह आसानी से देखा जा सकता है। रत्न उपरन्त या धातु के धारण से सभी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए यह सर्वोच्च विधि है। इस विधि से धारण किये गये रत्नों का प्रभाव भी शीघ्र मिलने लगता है। अनेकों को परिणाम तो आश्चर्यजनक मिलने है।
इस जांच प्रयोग में प्रयास जारी है कि ,धारक व्यक्ति की शतप्रतिशत समस्या का समाधान यथाशीघ्र हो, इंतजार है उस दिन का जिस दिन ये शोध कार्य पूर्ण एवं सफल होगा।

Saturday, May 24, 2008

जानकारियां मिलती हैं रूद्राक्ष जांच से :-

(१) बिना कुण्डली के, बिना हस्त रेखा देखे बिना ,उस व्यक्ति के ग्रहों की स्थिति क्या है तथा उसके कितने ग्रह उसके लिए अनुकूल या प्रतिकूल चल रहे है। ग्रहों की स्थिति के अनुसार उसके लिए कौन सा रत्न धारण करना अनुकूल होगा।

(२) ज्यादतर लोंगों का उपचार सिर्फ एक ही रत्न धारण करने से हो जाता है। कुछ ही लोंगों को दो रत्न या एक रत्न तथा एक धातु के धारण किये जाने से उसे पूर्ण रूप से राहत मिल जाती है।

(३) इस जांच से ग्रहों की स्थितिनुसार जिससे उसे लाभ मिले ऐसा जरूरी नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति को उमदा (उच्च कोटि) किस्म का ही रत्न धारण करने से लाभ मिले, कुछ लोंगों को निम्न कोटि का रत्न, तो कुछ लोंगों को मध्यम कोटि का रत्न, तो कुछ लोंगों को घाटिया किस्म के रत्न धारण करने से लाभ मिलता है। रत्न की कौन सी किस्म से अधिक लाभ मिलेगा यह भी देखा जाता है। चाहे वो रत्न हो या उपरत्न हो या कोई धातु हो या हल्दी की गांठ ही क्यों न हो ।

(४) इस जांच से यह भी देखा जाता है कि कितने कम से कम वजन या ज्यादा से ज्यादा वजन का रत्न धारण करने से पूर्ण लाभ मिल सकेगा।

(५) इस जांच से यह भी देखा जाता है कि धारक द्वारा धारण किये गये रत्न, उपरत्न,धातु, ताबीज उसके लिए प्रतिकूल है। धारण किये रत्न, धातु या ताबीज जांच में प्रतिकूल पाये जाते हैं, और उन्हें उतारने के बाद ग्रहों की स्थिति अनुकूल पायी जाती है तो उन्हें सिर्फ उतार दिये जाने से लाभ मिलने लगता है।

(६) इस जांच से यह भी देखा जाता है कि, सिर्फ रत्नों से ही लाभ मिलेगा या उपरत्नों से भी उतना ही लाभ मिल सकेगा या नहीं। इस बात का अवलोकन धारक व्यक्ति के स्तर तथा ग्रहों की स्थितिनुसार तय किया जाता है।

(७) इस जांच से धारक द्वारा धारण किये गये ताबिज ,जो कि तांत्रिकों द्वारा दिये जाते हैं, वे धारक के लिए प्रतिकूल है, की नही, जानकारी होती है।

(८) इस जांच से जैसे कुछ व्यक्तियों पर बाहरी हवा का प्रकोप हो या तांत्रिक क्रियाओं से प्रताड़ित हो ,की भी जानकारी मिलती है, प्रताड़ित व्यक्ति का भी रत्न धारण से निवारण संभव कुछ हद तक होता है।

(९) इस जांच द्वारा, जिस व्यक्ति को मानसिक परेशानी है जिसे डिपरेशन या हाइपरटेंशन कहा जा सकता है, का भी निवारण बहुत हद तक रत्न धारण किये जाने से होता है।

पीड़ित ग्रहों से उत्पन्न अनेकों समस्या के लिए ,इस जांच के आधार पर धारण किये गये रत्न से लाभान्वित होते, अनेकों लोगो को देखा गया है। यह जांच पीड़ित व्यक्ति की उपस्थिति बिना संभव नहीं है।

Monday, April 7, 2008

तबीज नही बर्बादी का बीज

ऐसा भी होता है जिसे ''दिव्य रूद्राक्ष`` द्वारा जांच करके देखा जा सकता है तांत्रिकों द्वारा दिये गये ताबिज,नीबू,चांवल,भभूत आदि कोई भी सामान की जांच करके यह देखा जा सकता है कि उक्त सामान धारण या ग्रहण कर्ता के लिए अनुकूल है या प्रतिकूल है। जैसा कि नीचे लिखे धारक के अनुसार सत्य घटना :-

मैं श्रीमती पूजा तिवारी ,श्री मुकेश तिवारी ,बोरसी,दुर्ग ।
मैं मंगलसूत्र के अलावा सोना,चांदी के गहने ही पहनती थी ,किसी भी प्रकार का रत्न या नग नहीं पहनती थी। करीब आठ माह पूर्व मेरे पिता ने मुझे एक ताबीज पहनने के लिए दिये थे,उक्त ताबिज एवं अन्य मैं अपना सुरक्षा कवच समझते हुए धारण कर ली थी। धीरे-धीरे मेरा पति के साथ झगड़ा होने लगा। शुरूआत में हल्के रूप से शुरू हुई। झगड़ा बढ़ते बढ़ते थाने तक पहुंच गया था। शारिरिक रूप से भी अस्वस्थ रहने लगी। मैं अपने पति को ही अपना शुभ चिन्तक नहीं समझती थी । शरीर मै भी भारी दर्द लगता था। बुद्धि तो ऐसी हो गई थी कि मैं कुछ अच्छा सोच नहीं सकती थी।

मेरे साथ मेरा पुत्र करीब चार माह का वह भी बीमार रहने लगा था। एक दिन पति के निवेदन पर दिनांक २.३.०८ को मैं नरेन्द्र कुमार अग्रवाल के पास अपने पति के साथ रूद्राक्ष द्वारा जांच करके मुझे बताया कि आपका केतु ,मंगल नीच का ,बुध,सूर्य एवं गुरू कुल छ: ग्रह एंटी है। फिर मेरे ताबिज को उतराकर रूद्राक्ष से जांच किये तो सभी ग्रहों को अनुकूल होना बताये। मुझे ताबिज उतारने का परामर्श दिया गया और मै ताबिज उतार कर आधा घंटा वहीं बैठे रही, इतनी ही देर में मुझे काफी हल्का महसूस होने लगा। मेरे पति ने ताबिज को ठंडा कर दिया। ताबिज उतारने के बाद दिन प्रति दिन मुझे काफी अच्छा लगने लगा।

इसके बाद दिनांक ४.३.०८को मैं दो नारियल जिसे मुझे उसी बैगा ने दिया था उसे भी मैं रूद्राक्ष द्वारा जांच कराने लाई थी। जांच उपरान्त नौ के नौ ग्रह प्रतिकूल पाये गये। दो मिनट हाथ में पकड़ने से ही मेरा शरीर भारी होने लगा और आंखे चढ़ने लगी। नारियल को भी तलाब में प्रवाहित कर दिया गया। उसी बैगा द्वारा काले और पीले रंग का चांवल तथा भभूत भी दी गई थी, को भी जांच कराने लाई। काले रंग का चावल का चार पांच दाना जब भी खाती थी खाने के बाद बुद्धि शुन्य अर्थात् कुछ भी सोच नही पाती थी। इसे खाने के बाद पति के प्रति क्रोध उत्पन्न होता था, तथा नफरत होने लगती थी। सिंदूर लगा चावाल के चार दाने फेकने के लिए दिया था, इसे फेकने के बाद (मेरे मन में) पति से मेरी लड़ाई होने लगती थी तथा पति को जान से मारने का भी ख्याल मन में आता था, पति के प्रति मेरे मन में कई प्रकार की दुर्भावना आने लगती थी। भष्म (भभूति) को जब भी खाती थी तो मेरा शरीर शिथिल अधमरा जैसा सुस्त हो जाता था और मैं मनहीमन पति के प्रति क्रोधित होते हुए नफ्रत करती थी। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच करके श्री अग्रवाल जी द्वारा बताये गये फलों को जो उपर लिखे हैं उसे मैं स्वीकार करते हुए पुष्टि करते हुए पुष्टि करती हूं।

श्री अग्रवाल जी के परामर्शनुसार इन सभी सामानों को तालाब में प्रवाहित किया गया। मुझे भी जांच उपरांत ऐसा विश्वास हो गया कि ये सभी सामान जब से मेरे पास आया है तब से उपरोक्तानुसार बताई गई घटनाएं मेरे साथ घटित होती रहती थी की वजहा जांच उपरांत समझ में आया। उपरोक्त सभी बातों से मैं समहत हूं। सभी सामान को विसर्जित करने के एक सप्ताह के अंदर मेरे पति के साथ संबंध काफी मधुर हो गये एक दूसरे के प्रति चाहत भी काफी बढ़ गयी जिसकी मैने कभी कल्पना भी नहीं की थी। समस्त परिवर्तन आश्चर्य जनक था। अत: मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि श्री अग्रवालजी को भगवान इसी प्रकार सेवा कार्य करने की शक्ति बरकरार रखें।

श्रीमती पूजा तिवारी ,मुकेश तिवारी मोब.नं.:-९३००६०२९१४ दिनांक १४.०३.०८

Thursday, March 27, 2008

लालच बुरी बला

कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो लालच वश बड़े-बड़े रत्न या उपरत्न अनेकों प्रकार के एक साथ धारणकर लेते हैं इस मानसिकता के साथ कि जितना ज्यादा बड़ा रत्न होगा उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा। जितने ज्यादा ग्रहों के रत्न धारण करूंगा उतने ग्रहों की ताकत अधिक होगी और अधिक लाभ होगा। इस प्रकार की मानसिकता से धारण किये गये रत्नों का अनुभव भी ठीक नहीं पाया गया। कोई भी रत्न आवश्यकता से अधिक वजन का धारण करने से लाभ के बदले नुकसान हो सकता है, ऐसे अनेकों लोगों की रूद्राक्ष से जांच की गयी और उन्हें उचित वजन के रत्न धारण तथा आवश्यकतानुसार रत्न धारण का परामर्श से लाभान्वित होते देखा गया।

Wednesday, March 26, 2008

रत्नों के अलावा अन्य का भी प्रभाव

रत्न तो अपना प्रभाव दिखाते ही हैं परन्तु रूद्राक्ष जांच के आधार पर उपरत्न, एमीटीशन, भी धारण करा कर देखे गये हैं जिनका प्रभाव भी रत्नों जैसा व समकक्ष प्राप्त हुए हैं रूद्राक्ष जांच की विशेषता है कि जातक को जी रत्न धारण कराया जा रहा है वह उसे सूट करेगा या नहीं तुरन्त जानकारी हो जाता है। रत्नों के अलावा कुछ धातु एवं जड़ी बूटी भी धारक को सूट करेगी या नहीं ये भी आसानी से रूद्राक्ष जांच विधि से ज्ञात होता है। इस विधि से ग्रहों की बारीक से बारीक स्थिति की जानकारी होती है। इससे बहुत ही तात्कालिक प्रभाव मिलते है।

(१)
श्री गणेशाय नम:

कमलेश सिंह ठाकुर (पम्मु ठाकुर) राजा पारा डौण्डी लोहारा।
जन्म राशि मिथुन समस्या :-जांच के समय शुक्र, मंगल ,राहु एंटी थे तथा मन में घबरहट रहना, मन में उल्टे सीधे ख्याल ,अपनी बात को किसी के सामने ना रख पाना एवं रात में डारावने स्वप्न आना तथा जब गुस्सा आये तो अनकंट्रोल गुस्सा आता था। रूद्राक्ष जांच से ओनेक्स उपरत्न से सभी ग्रह पाजेटिव हो गये। ओनेक्स कनिष्ठा अंगुली में धारण कराया गया जिसका असर २४ घंटे के अंदर ही काफी सकारात्मक महसूस होने लगा मन में घबराहट में कमी आयी तथा मन में काफी प्रशन्नता लगने लगी। धारण उपरांत रात में डारावने सपने आने बंद हो गये। मोब.नं.:-०९९९३३३६६३१,९९९३४४३५७३.

(२)

पंडित मुकेश शर्मा जन्म राशि वृषभ
समस्या :-जांच के समय मंगल ,राहु दो ग्रह एंटी थे। समस्या थी किसी भी काम में मन नहीे लगना तथा पत्नि से कहा सुनी होना ,धंधा मंदा होना। दिव्य रूद्राक्ष जांच से देखने पर ओनेक्स उपरत्न से सभी कारक ग्रहों की स्थिति सकारात्मक हुई। ओनेक्स की अंगुठी धारण के २४ घंटे में मन का बोझ पूर्ण रूप से समाप्त हो गया और शरीर हल्का लगने लगा तथा १५ दिन के अंदर पति -पत्नि विवाद पूर्ण रूप से समाप्त हो गया और अब वे सुख से गृहस्थ जीवन व्यतीत कर रहे है। मोब.नं.:-०९३००६०२९१४

(३)
असीम गर्ग पूर्ण मेष राशि समस्या :-पन्ना व टोपाज धारण किये थे फिर भी उनकों अपने नौकरी में मन नहीं लगने की तथा मानसिक तनाव रहने की समस्या थी । दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच किये जाने पर पता लगा कि टोपाज व पन्ना सूट नहीे कर रहा है दोनों रत्नों को उतार कर रूद्राक्ष जांच करने पर पता चला कि राहू एंटी है तथा गोमेद रत्न धारण कराया गया और टोपाज पन्ना नहीं पहनने की सलाह दी गई। २४ घंटे बाद गोमेद धारण का रिजल्ट था कि मन में प्रशन्नता महसूस होने लगी और १५ दिन के अंदर समस्या समाप्त हो गयी। मोब.नं. :- ०९९२३४१०८००.


(४)

संजय चक्रवर्ती रायपुर जन्म राशि कन्या
समस्या :- व्यापार मंदा होना तथा मानसिक तनाव रहने की समस्या थी । दिव्य रूद्राक्ष से जांच किये जाने पर मंगल तथा राहू दो ग्रह एंटी पाये गये जिसका उपचार रूद्राक्ष जांच किये जाने पर पन्ना से होना पाया गया और पन्ना रत्न धारण कराया गया। पन्ना धारण के २४ घंटे का रिजल्ट था हल्का-हल्का मानसिक तनाव कम महसूस हुआ तथा एक सप्ताह मंे मानसिक तनाव पूरा समाप्त हो गया और पूर्ण रूप से प्रशन्न रहना तथा धंधे में हल्का सुधार आना बताया गया। मोब.नं.:- ०९८२७१६१४४३२,०९३०२४०८९२२.

(५)

संतोष राठी ,साजा जन्म राशि कंुभ
समस्या :-पति-पत्नि विवाद तथा मन डामाडोल होना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच किये जाने पर केतु एवं गुरू ग्रह एंटी होना पाया गया तथा २.५० कैरेट का पुखराज धारण कराया गया उक्त पुखराज को शुक्रवार के दिन धारण कराया गया क्यों कि समस्या कुछ ज्यादा ही गड़बड़ थी। धारण उपरांत पहले २४ घंटे में हल्का हल्का महसूस होना तथा आठ दिन में समस्या में पूर्ण रूप से सुधार होना एवं सुख पूर्वक जिन्दगी के आनंद का महसूस करना बताया गया। फोन नं.:- ०७८२५२६९२३२,०९४०६२०७८८०.

(६)

भरतलाल साहू ,जवरा ,राशि धनु
समस्या :- खूनी बबासीर। उक्त का एक बार आपरेशन हो चुका था। कुछ दिनों बाद फिर से तकलीफ चालू हो गई थी। रूद्राक्ष द्वारा जांच पर सूर्य,शनि ,गुरू तीनों ग्रह बहुत कमजोर पाये गये । दिव्य रूद्राक्ष जांच से माहेमरियम स्टोन वजन १० कैरेट का सूट करना पाया गया । उक्त स्टोन धारण से एक सप्ताह के अंदर बबासीर की तकलीफ नगण्य समान हो गयी। करीब १५ दिन के अंदर बबासीर पूर्ण रूप से ठीक होना बताया गया। अत: अब वो कष्ट मुक्त जीवन व्यतीत कर रहा है। फोन नं. :-०७८८-३२०६३८८

(७)

श्री रवि प्रकाश पाण्डे,खुर्सीपार भिलाई जन्म राशि वृषभ
समस्या :- नींद नही आना ,पति-पत्नि तनाव,धंधा मंदा आदि। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच से शुक्र एवं गुरू ग्रह एंटी होना पाया गया। २.५० कैरेट का पन्ना से सभी ग्रहों की अनुकूल स्थिति होना पायी गई और २.५० कैरेट का पन्ना धारण कराया गया। धारण उपरांत पहली रात से ही नींद अच्छी आना शुरू हो गई तथा दो दिन बाद से पत्नि के साथ भी मधुर संबंध स्थापित होने लगे। अब ये सुखी है। मोब.नं. :७- ०९४२४११३१९०.

(८)

श्रीमती सीता मेश्राम,दुर्ग जन्म राशि मेष
समस्या :- नींद कम आना, लोकप्रियता से पूर्ण संतुष्टी नहीं,काम में रूकावट आदि। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच से गुरू ग्रह एंटी होना पाया गया जिसे ५ कैरेट फिरोजा तथा ४.२५ कैरेट मोती से गुरू को अनुकूल किया गया। उक्त दोनों रत्न धारण उपरांत पहली रात से ही नींद ठीक से आना शुरू हो गयी तथा तीन दिन बाद से रूके हुए काम होनंे लगे तथा लोकप्रियता में भी वृद्धि होने लगी । इस प्रकार से अब काफी संतुष्ट है। मोब.नं. :- ०९८२९४८२७३७.

(९)

श्री ओंकार सिंग उर्फ काले ,दुर्ग जन्म राशि वृषभ ।
समस्या :- पति पत्नि तू तू ,मैं मैं, कांफीडेंस मै कमी, धंधा चाहत से कम ,उपरोक्त समस्या पुखराज,मोती, अमेरिकन डायमंड तथा घोड़े के नाल की रिंग धारण की स्थिति में बनी हुई थी। सभी अंगुठी को उतार कर दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच करने पर मंगल एवं गुरू ग्रह एंटी होना पाया गया। उक्त ग्रह ७.५० कैरेट के फिरोजा को मध्यमा अंगुठी में धारण करने से ग्रहों की स्थिति अनुकूल हुई। सिर्फ फिरोजा धारण करने के तीन दिन के अंदर अच्छा लगना महसूस किया गया तथा १९ दिन के अंदर आपसी संबंध एवं कांफीडेंस में पूर्ण रूप से सुधार होना बताया। अब वे सुखी हैं। मोब. नं.:-०९४२५५५७८७१

(१०)

कुमारी भावना साहू ,राजनांदगांव ,जन्म राशि धनु ।
समस्या :- पढ़ाई में मन नहीं लगना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच किये जाने पर सूर्य,गुरू एवं राहू ग्रहों की स्थिति एंटी थी। जिसे ३ कैरेट के पुखराज से ग्रहों को अनुकुल किया गया । पुखराज धारण के एक सप्ताह के अंदर पढ़ाई में मन लगनंे लगा। अब वह अच्छे से पढ़ाई कर रही है। फोन नं. :- ०७७४४-२२३५०५

(११)

श्री राजकुमार गोयल, इंडस्ट्रियल स्टेट हाऊसिंग बोर्ड,भिलाई। कुण्डली में वृषभ राशि
समस्या :- मन में धबराहट बनी रहना तथा कांफीडेंस में कमी आदि। दिव्य रूद्राक्ष से जांच किये जाने पर चंद्रमा,बुध, सूर्य एवं गुरू कुल चार ग्रह एंटी पाये गये। हिन्दी में वैक्रांतमणी एवं अंग्रेजी में तिरमूलिन उपरत्न ३.५० कैरेट धारण कराया गया । उक्त रत्न धारण पश्चात् करीब ११दिनों के बाद से थोड़ा सुधार आना शुरू हुआ और करीब एक माह के अंदर शत् प्रतिशत सुधार हो गया। मोब.नं. :- ०९८२७१६१६३३

(१२)

श्रीमती कमलजीत कौर,दुर्ग, कुण्डली से कन्या राशि।
समस्या :- कांफीडेंस में कमी होना। दिव्य रूद्राक्ष से जांच किये जाने पर मंगल,बुध,एवं राहू तीनों ग्रह एंटी पाये गये। उक्त तीनों ग्रहों को तिरमूलिन ३.०० कैरेट उपरत्न धारण कराया गया। २४ घंटे के अंदर ही कांफीडेंस में काफी सुधार होना बताया गया और १० दिन के अंदर पूर्ण रूप से सुधार होना बताया गया। और वे पूरी तरह से ठीक है। मोब.नं. :- ०९४२५५५२७८९

(१३)

श्री जयदीप सिंग उपनाम उन्नू ,दुर्ग जन्म राशि मकर।
समस्या :- टेंशन से ग्रसित। दिव्य रूद्राक्ष से जांच किये जाने पर चंद्रमा,मंगल,एवं सूर्य तीनों ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल थी। जिसे सिलौनी गोमेद ५.२५ कैरेट से अनुकूल होना पाया गया। सिलौनी गोमेद चांदी में धारण बाद पहले दिन से हल्का हल्का सुधार होते होते तेरह दिन में पूरा सुधार होना बताया गया। मोब.नं. :- ०९४२५५५२७८९.

(१४)

श्री कर्मजीत सिंह ,उपनाम राकी,कुण्डली से मिथुन राशि।
समस्या :- टेंशन एवं व्यापार मै नुकसान। दिव्य रूद्राक्ष से जांचे किये जाने पर बुध,मंगल,एवं बुध तीनों ग्रह एंटी होना पाया गया उक्त ग्रहों की स्थिति अनुकूल करने के लिए २.५० कैरेट का पन्ना तथा ५.०० कैरेट अमेरिकन डायमण्ड चांदी मैं रिंग बना कर धारण कराया गया। धारण पश्चात् धारण दिन से १५ दिन के अंदर पूरा सुधार होना बताया और अब वो संतुष्ट है। मोब.नं. :- ०९८२६६२७०००.

(१५)

श्री राजीव शहगल ,सेक्टर-९,भिलाई, तुला राशि।
समस्या :- रात में नींद ना आने की भारी समस्या थी। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर शुक्र,नीच का मंगल,गुरू एवं राहु कुल चार ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल आयी। ३.५० कैरेट गोमेद को चांदी के रिंग में शनिवार की रात में धारण कराये जाने पर दूसरी रात से ही अच्छी तरह से नींद आने लग । नींद के अलावा और भी काम में निरंतर सुधार होना बताया। मोब.नं. :- ०९९०७१८०७९६.

(१६)
श्री संतोष कुमार दुबे, जी.पी.आर.भिलाई, कुण्डली में कर्क राशि।
समस्या :- काम में रूकावट ,तनाव के अलावा अन्य आय में रूकावट, मन डामाडोल होना,पत्नि से हल्की झड़प होना, गुस्सा आना, मन भ्रमित होना, आदि। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर बुध,नीच का मंगल,गुरू,राहू एवं सूर्य कुछ ग्रह एंटी थे। जो कि ८.२५ कैरेट मोती से ठीक होना पाये गये। अत: उक्त वजन का मोती धारण कराया गया। २४ दिन के अंतर्गत सभी समस्याओं में पूर्ण रूप से सुधार होना पाया गया। मोब.नं. :- ०९४२५३८५८०९,०९३०१६१८६५४, ०७८८-२२२६८३८.

(१७)

श्री बिसेलाल साहू, वृषभ राशि।
समस्या :- ठेकेेदारी के काम में रूकावट होना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर बुध,नीच का मंगल एंटी पाया गया। उक्त एंटी ग्रहों की स्थिति मै ३.०० कैरेट के एमिथिस्ट उपरत्न से पाजेटिव रिजल्ट होना पाया गया। अत: एमिथिस्ट चांदी के रिंग में धारण कराया गया। जिसका प्रतिफल दो माह के अंदर पूर्ण रूप में मिलनं लगा। अब धारक बहुत प्रशन्न है। मोब.नं. :- ०९३०२८३५६३०.

(१८)
श्री पी.के. अंगूरे,पुलिस विभाग दुर्ग,कन्या राशि।
समस्या :- आप दो वर्ष पूर्व दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर मंगल,चंद्रमा एंटी थी जिससे तनखा के अलावा अन्य आय में भी रूकावट थी तथा खर्च भी बहुत होता था। पैसा हाथ में रूकता ही नही था। तब उस समय ३.००कैरेट का मोती धारण कराया गया धारण उपरांत दूसरे दिन से समस्या सुधार गयी थी जिसका लाभ दो वर्ष तक मिलता रहा अब पुन: परेशानी आयी तब पुन: दिव्य रूद्राक्ष दिव्य रूद्राक्ष दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांच की गयी तो इस समय मोती सूट नहीं कर रहा था उसे उतार कर जांच करने पर शुक्र,चंद्र,मंगल नीच तथा राहु चार ग्रह एंटी पाये गये जो कि ३.५० कैरेट के इस्फटीक उपरत्न से पाजेटिव होना पाये गये अत: धारण कराया गया । धारण उपरांत ११ दिन के अंदर पूर्ण रूप से समस्या से मुक्ति पा गये और अब वे प्रशन्न हैं तथा लिखित में भी राजिस्टर में अपने अनुभव दर्ज किये है। मोब.नं. :- ०९४०६२३८९०१.

(१९)

कु.सोनल गुप्ता, दुर्ग,कुण्डली से कुंभ राशि।
समस्या :- विवाह नही करने की जिद। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर बुध,नीच का मंगल, एव सूर्य ये तीन ग्रह एंटी होना पाये गये। उक्त तीनोंे ग्रह २.७५ कैरेट पन्ना रत्न को चांदी के रिंग में धारण कराने से ठीक होना पाया गया। अत: पन्ना रत्न धारण कराया गया। धारण उपरांत नौ दिन के अंदर ३-४ रिश्ते शादी के लिए आ गये जो आ ही नही रहे थे तथा सोनल शादी नहीं करने की जिद भी छोड़ दी आगे भगवान की मर्जी। फोन.नं. :- ०७८८-२३२८९७०.

(२०)

श्री विजय कुमार सिंग,चरोदा भिलाई,वृषभ राशि।
समस्या :- पति-पत्नि विवाद तथा व्यापार में नुकसान होना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर बुध,नीच का मंगल,एवं राहु तीन ग्रह एंटी होना पाये गये जो कि ५.०० कैरेट के तिरमूलिन से ठीक होना पाये गये । अत: ५.०० कैरेट का तिरमूलिन उपरांत चांदी के रिंग में धारण कराया गया बुधवार को धारण उपरांत दूसरे ही दिन से काफी फर्क महसूस होने लगा और १५ दिन के अंदर पूरा ठीक हो गया। मोब.नं. :- ०९८२६७४८५९२, ०७२६-२५५५३०.

(२१)

कु.स्वाती गुप्ता,दुर्ग,चित्रा नक्षत्र,कन्या राशि।
समस्या :- विवाह का रिश्ता तय होने के बाद श्वसूर के तरफ से रिश्ता तोड़ने का संदेश आ चुका था कि उक्त रिश्ता तोड़ना चाहते हैं। जन्म ता. १२.९.८०जन्म स्थान बालाघाट (म.प्र.) दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर नीच का मंगल,गुरू एवं राहु तीन ग्रह एंटी होना पाये गये। जो कि ७.२५ कैरेट के फिरोजा उपरत्न को चांदी के रिंग में मध्यम अंगूली में धारण कराया गया। धारण उपरांत १५ दिन के अंदर उसी श्वसूर द्वारा पुन: संदेश भेजा गया कि दो महिने के अंदर अच्छा सावा (मूहर्त) निकालवा लें शीघ्र विवाह करना है और इस प्रकार से कुल दो माह के अंदर विवाह हो गया। अब पूरे परिवार के साथ स्वाती खुश है। फोन नं. :- ०७८८-२३२८९७०.

(२२)

श्री श्याम पराते, ग्राम बरहापुर तहसील धमधा,कुंभ राशि
समस्या :-पति-पत्नि में भंयकर विवाद तथा व्यापार मंदा। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर सूर्य,एवं राहु एंटी थी जो कि २.६० कैरेट पन्ना से स्थिति में सुधार आ रहा था अत: पन्ना चांदी के रिंग में धारण कराये जाने पर १५ दिन के अंदर की जानकारी के मुताबिक पति-पत्नि विवाद समाप्त होना तथा व्यापार में प्रोग्रेस बताया गया। मोब.नं. :- ०९३०१२५३०४९.

(२३)

श्री अभिषेक सिंह ,दुर्ग,जन्म राशि वृषभ।
समस्या :- कांफीडेंस की कमी तथा हाथ में पैसा नहीं रूकना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर शुक्र,तथा केतु दो ग्रह ग्रह एंटी होना पाये गये। जो कि ४.५० कैरेट के ओपल उपरत्न धारण किये जाने का निर्देष दिया गया धारण उपरांत १५दिन के अंदर दोनों समस्या में काफी सुधार होना बताया गया। मोब.नं. :- ०९८२६५३४५५५.

(२४)

श्री सुखदेव जसवानी, दुर्ग,कुंभ राशि ।
समस्या :- गृहस्थ जीवन अशांत होना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर बुध एवं गुरू एंटी थे जो कि २.६० कैरेट के सुनैला (टोपाज) उपरत्न चांदी के रिंग में धारण कराया गया जिससे सात दिन मे हल्का हल्का सुधार मालूम पड़ने लगा। मोब.नं. :- ०९८२६१८८००.

(२५)

श्रीमती सोनिया दोडी,दुर्ग,कुंभ राशि।
समस्या :- शारिरिक कष्ट , गुस्सा, आपस में हल्का तनाव। धारण रत्न :- फिरोजा,मोती, माणक ,हीरा,पन्ना। पूर्व में धारण किये गये सभी रत्नो को उतार कर , दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर नीच का मंगल,एवं गुरू एंटी होना पाया गया। उक्त सभी समस्या में सुधार हेतु सिर्फ पुखराज धारण करने का निर्देश दिया गया। धारण उपरांत राहत मिलना बताया गया। मोब.नं. :- ०९२२९२३७२७२.

(२६)

श्रीमती किरण पलारिया,एडव्होकेट,दुर्ग,कुण्डली से मीन राशि।
समस्या :- मानसिक तनाव, सम्मान में कमी महसूस करना एवं मन विचलित होना आदि समस्या इन रत्नों के धारण उपरांत भी थी । धारण किये गये रत्न पुखराज,गोमेद,अकीक,हीरा। इन सभी को उतार कर, दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर शुक्र,मंगल,और बुध तीन ग्रह एंटी थे। जिसे ४.५० कैरेट का मंूगा चांदी के रिेंग में धारण कराया गया। समस्या में तीन दिन के अंदर ही सुधार होना चालु हो गया तथा १५ दिन के अंदर करीब करीब सभी समस्या में सुधार आ गया। मोब.नं. :- ०९४२४२४३५२,०९८२७९३०९१६.

(२७)

श्री योगेश जी अग्रवाल,भिलाई,तुला राशि।
समस्या :-काम में रूकावट तथा पैर में दर्द होना। रत्नों एवं ज्योतिष पर विश्वास नहीं फिर भी त्रस्त होकर एक बार देखना चाहिये इस नियत से जांच कराने आये। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर नीच का मंगल,गुरू एवं राहु तीन ग्रह एंटी थे। जिसे ४.२५ कैरेट का गोमेद चांदी के रिेंग में तथा साथ में शीशा (लेड) धातु का रिंग धारण कराया गया। धारण उपरांत ५ दिन से थोडा-थोडा फर्क होते होते पूरा ठीक हो गया बिना किसी दवा के।

(२८)

श्री राहुल मण्डावी,भिलाई,तुला राशि,मीन लग्न,चित्रा नक्षत्र पूर्व में धारण पुखराज।
समस्या :-नींद बहुत आना तथा पढ़ाई में मन कम लगना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर शुक्र,नीच का मंगल,एवं राहु एंटी था । जिसे ८.६०कैरेट का मोती चांदी के रिंग में धारण कराया गया। जिससे कुछ सुधार होना बताया गया। फोन नं. :-०७८८-२२२७४३१,०९४२१०६३७७.

(२९)

श्री गुलाब चंद साहू , पुलगांव दुर्ग, कुंभ राशि।
समस्या :-संतान हीन,टेंशन,पति-पत्नि विवाद,तरक्की में रूकावाट आदि। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर शुक्र, बुध, गुरू, सूर्य एवं राहु कुल छ: ग्रह एंटी थे। जो कि २.१०० कैरेट का तिरमूलिन चांदी के रिंग में धारण कराया गया । धारण उपरांत पहली रात के बाद से राहत मिलना महसूस होने लगा तथा धारण दिनांक से ८ दिन बाद भी लगातार प्रभावशील होना बताया। मोब.नं. :- ०९८२६९९६४३.

(३०)
श्री शैलेन्दर सिंग सरदार, कुंभ राशि।
समस्या :-मन में घबराहट बनी रहना तथा लगातार अनेकों जांच कराने पर भी बीमारी पकड़ में नही आना। धारण लोहे का कड़ा। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर गुरू एवं राहु दो ग्रह एंटी थे। जिसे ६.५० कैरेट का फिरोजा चांदी के रिंग में धारण कराया गया। धारण किया उसी दिन इलाज के लिए मुंबई रवाना हो गया और फिर वहां हास़्पिटल में जांच कराया। बीमारी तुरंत पता चल गया और उसका सही इलाज हो गया ,तथा मन में जो घबराहट बनी रहती थी वो तो तुरंत धारण करने के एक घंटे के अंदर ही ठीक हो गई थी। और आज आठ माह बाद भी यही सुधार की स्थिति बनी हुई है। अब वो सुखी है। मोब.नं. :- ०९८२७१६२६५४.

(३१)

श्री अमृत शाह ,टेड़ेसारा ,दुर्ग,मेष राशि पूर्व में धारण मोती ।
समस्या :-दोनोंे हाथ की चमड़ी काली होना तथा भंयकर जलन होना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर राहु एंटी था बिना मोती पहने । ३.०० कैरेट का मंूगा चांदी के रिंग में धारण कराया गया। ४ दिन से जलन कम होने लगी तथा चमडी का काला पन भी ठीक होने लगा था और करीब एक माह के अंदर पूरा ठीक हो गया। छ: माह बाद अपने साथ एक दुखी मित्र को जांच कराने के लिए लेकर आये तब बताये मे अभी तक तो सुख हॅंू। मोब.नं. :- ०९२२९१२१५५१.


(३२)

श्रीमती सतमान कौर, भिलाई ,कुंभ राशि ।
समस्या :- थायराइड से मोटापा बढ़ना तथा अन्य कष्ट। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर शुक्र, बुध एवं राहु तीन ग्रह एंटी थे। ३.५० कैरेट का एमीथिस्ट उपरत्न चांदी के रिेेग में धारण कराया गया। थाइराइड के अलावा अन्य प्राबलय में ४ दिन से थोडा-़थोडा सुधार महसूस होने लगा। पांच माह में १३ किलोग्राम वजन कम हुआ। अब बाडी स्लिम हो गयी तथा बहुत खुश है। फोन नं. :- ०७८८-२२७९७८७,९३००६६१८७४.

(३३)

श्री स्वपन कुमार कुण्डू, ए.जी.एम. बी.एस.पी. कुंभ राशि।
समस्या :- पेटे में अजीन सी हरकत होता थी जिसका बी.एस.पी. हास्पीटल में अनेकों जांच के साथ इलाज होता रहा। कोई फायदा नहीं था मोती और नाल की अंगूठी धारण किये हुए थे । धारण की स्थिति में दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर चंद्रमा ,बुध एवं गुरू तीन ग्रह एंटी थे । दोनों रिंग उतार कर जांच किये जाने पर सिर्फ ४.०० कैरेट का तिरमूलिन चांदी के रिेंग मेंं धारण कराया गया जिससे बिना दवा के पेट के अंदर वाली समस्या समाप्त हो गई। मोब.नं. :- ०९४२५२९७१६५.

(३४)
श्रीमती दीक्षा तिवारी, दुर्ग, मीन राशि आश्लेषा नक्षत्र की कुण्डली।
धारण रत्न :-घोड़े की नाल का रिेंग तथा नांक में ए.डी. का कांटा।
समस्या :- जाब नहीं मिलना तथा पति का झुकाव कम होना। दिव्य रूद्राक्ष द्वारा जांचे जाने पर चंद्रमा,गुरू,बुध,सूर्य एवं राहु पांच ग्रह एंटी थे। जिसे उतार कर जांच किये जाने पर सभी ग्रह अनुकूल बता रहे थे। सूर्य एवं गुरू बहुत कमजोर नजर आ रहे थे जिसके लिए पुखराज चांदी के रिंग में धारण कराया गया। धारण उपरांत एक सप्ताह में पति का पूरा झुकाव मालूूम पड़ने लगा तथा एक माह के अंदर कालेज में लेक्चरार का जॉब भी मिल गया। अब सुखी है। फोन नं. :- ०७८८-२३३४९८.

Sunday, March 23, 2008

नीम हकीमों से सावधान # रत्न धारण

अक्सर लोग जब तकलीफ के दौर से गुजरते हैं तो किसी भी व्यक्ति के कह देने से या कुछ लोग अपने मन से नाल की अंगूठी या नीलम धारण कर लेते है, क्यों कि अक्सर धारणा यही होती है कि मुझे शनि परेशान कर रहा है जबकि ऐसा कम होता है पर बदनाम शनि जो है। जनसाधारण व्यक्ति इसी धारणा से अंगूठी धारण कर लेते है, अक्सर लोगों की तकलीफें बढ़ जाती है, परन्तु वे ये समझते है कि, मै ये अंगूठी धारण नहीं करता तो पता नही मेरा और क्या बुरा हाल होता और कष्ट मय जीवन व्यतीत करते रहते है। इसलिए रत्नों व धातु का उपयोग बिना विद्वान के परामर्श बिना नहीें करना चाहिये। उक्त जानकारी रूद्राक्ष जांच से स्पष्ट हुई है।

प्रत्येक राशि के सभी कारक ग्रहों के रत्नो को एक साथ धारण करने का परिणाम अक्सर खराब आता है :-

जैसे वृश्चिक राशि के कारक ग्रह सूर्य,चंद्र,मंगल और गुरू है और इनके रत्न माणक ,मोती,मंूगा और पुखराज है तो इन चारों का एक लाकेट या ये चारों की अलग-अलग अंगूठी बना कर एक साथ धारण करने के परिणाम भी रूद्राक्ष जांच में खराब पाये गये है, क्योंकि जिस रत्न की उस समय आवश्यकता नहीं है और धारण किया गया है तो वह अपना दुष्प्रभाव भी दिखा सकता है। अत: समय-समय पर आवश्यकतानुसार ही रत्न धारण करना चाियीे ऐसे कई धारणकर्ता की रूद्राक्ष द्वारा जांच की गई और ये पाया गया कि सभी कारक ग्रहों के रत्न राशिनुसार एक साथ धारण से कई प्रकार की तकलीफें होती है। अनावश्यक पाया गया रत्न उतरा देने से जातक की तकलीफ दूर होते रेखा गया है। इसी लिए कहते हैं असम अनावश्यक रत्न धारण करना अनुचित होता है।

कोई भी रत्न आजीवन धारण किये जाने पर हानि कारक हो सकता है

अधिकतर रत्न धारक रत्न धारण करने के बाद ये समझते रहते हैं कि मैं तो अमुख रत्न धारण कर लिया हॅू , अब मुझे आजीवन कष्ट नहीं हो सकता बल्कि लाभ ही होगा। परन्तु ऐसा नही है वास्तविक जीवन में कोई भी राशि का जीवन रत्न को भी आजीवन धारण नहीं किया जा सकता। ऐसे अनेकों लोगों की रूद्राक्ष द्वारा जांच करके देखा गया है, जातक जीवन रत्न है समझ कर धारण किये थे, परन्तु उन्हें कुछ समय पश्चात् कुछ तकनीफें होने लगी, जांच उपरान्त ये पाया गया कि जो रत्न धारण किया है तकलीफ उसी से है, उसे उतारने पर बिना किसी और रत्न धारण के तकलीफें दूर हो जाती है। रत्न बहुत शक्तिशाली होते हैं इनसे खिलवाड़ नहीं करना चाहिये। इसी लिए कहते है कि असमय अनावश्यक रत्न धारण करना हानिकारक भी हो सकता है।

Saturday, March 15, 2008

रूद्राक्ष प्रयोग : देखें वीडियो में

ज्योतिष में जैसे बिना कुण्डली के जातक के लिये उपयुक्त रत्न धारण के संबंध में अन्यान्य पद्धतियां प्रचलित है वैसे ही यह रूद्राक्ष प्रयोग है, देखिये क्या है रूद्राक्ष प्रयोग वीडियो में :-
video

Wednesday, March 12, 2008

कैसे होती है रूद्राक्ष जांच : जानकारी

रूद्राक्ष जांच से रत्नों का चमत्कारिक लाभ ये है कि जातक के ग्रहों की वर्तमान स्तिथि क्या है और कैसी है, की जानकारी तुरन्त हो जाती है, यह जांच जातक की स्वयं की उपस्थिति में ही संभव है। इस जांच से ग्रहों की स्थिति की जानकारी करने और जांच कराने वाले तथा साथ में आये मेहमान सभी को दिखाई देती है। प्रत्येक इंसान के ग्रहों की स्थिति हमेशा अनुकूल नहीं होती, यदि सभी लोगो की स्थिति हमेशा अनुकूल होती तो फिर बात दुख की ही क्या थी।

रूद्राक्ष जांच प्रयोग से जातक के प्रतिकूल ग्रहों को देख कर उन्हें अनुकूल बनाने के लिए अलग अलग रत्नों से जांच कर निर्णय लिया जाता है कि जातक के लिए कौन सा रत्न धारण करना कितना उचित होगा इस जांच से धारण कराये गये रत्न अपना प्रभाव कुछ लोगों को तो तत्काल दिखा देते है, तथा कुछ लोगो को तीन से सात दिन के अंदर आंशिक रूप से दिखाना शुरू कर देते हैं तथा कुछ लोगों को विलंभ से दिखाते है। जिन लोगों की बहुत जटिल अर्थात नुकसान दायक स्थिति होती है, उन्हें होने वाले नुकसान से भी बचाव होता है, था कुछ लोगो का नुकसान रत्न धारण पश्चात् होना बंद हो जाता है।

इस जांच द्वारा यह भी आसानी से देखा जा सकता है जैसे कि कुछ समस्या के निदान हेतु अनेेक प्रकार के रत्न या रत्न के साथ कुछ धातु धारण किये होते है, तो उनमें से कौन सा रत्न या धातु उनके लिए धारण करना नुकसान दायक है, ये देखकर आसानी से निर्णय लिया जाता है। इस निर्णय के अनुसार धारण कर्ता को त्वरित लाभ महसूस होने लगता है कुछ लोग अनावश्यक रत्न या धातु या दोनो धारण किये होते है इसको भी जांच द्वारा देखकर उन्हें भी उतार देने मात्र से भी समस्या सुलझ जाती है। इसी लिए कहते है कि असमय अनावश्यक रत्न धारण करना अनुचित होता है। यह बात इस विशेष जांच द्वारा आसानी से देखी जा सकती है। रूद्राक्ष जांच से यह भी देखा जा सकता है कि जातक का कारक ग्रह प्रतिकूल है और उसे अनुकूल करने के लिए कौन सा रत्न या धातु या जड़ी बूटी धारण करना होगा जिससे वह अनुकूल होकर उसे लाभ दे सके। इस जांच की विशेषताएं अनेक हैं जिसका उल्लेख बहुत लंबा होगा अत: इसे यही विराम लंबा होगा अत: इसे यही विराम दिया जाता है। आइये ''रूद्राक्ष जांच`` के दुर्लभ अनुभवों को समझे ........!

श्री प्रकाश नाथ ,भिलाई ,कन्या राशि।

समस्या :- भयंकर टेंशन ,धारण किये थे माणक, पुखराज, और मंूगा उक्त तीनों रत्न धारण की स्थिति में रूद्राक्ष द्वारा जांच किये जाने पर शुक,केतु,चन्द्रमा,बुध,मंगल नीच ,तथा राहु कुल : ग्रह एंटी होना देखा गया तथा धारण किये गये तीनों रिंग को उतार कर पुन: रूद्राक्ष द्वारा जांच की गयी इस स्थिति में बुध ,तथा मंगल दो ग्रहों की स्थिति एंटी प्राप्त हुईर्। .२५ कैरेट के पन्ना को चांदी के रिंग में धारण कनिष्टा अंगुली मै बुधवार को कराया गया। गुरूवार को प्रात: धारक द्वारा जानकारी दी गई कि अब बिलकुल भी टेंशन नही लग रहा है अब मैं टेंशन फ्री हो गया हॅू। मोब.नं०:- ९८९३२३९९३२.

श्री एस.के. नारायण,डिप्टी जनरल मैनजर ,प्रोजेक्ट,बी.एस.बी.,भिलाई कुण्डली से कर्क राशि।

समस्या :- टेंशन तथा इलाज से भी शारिरिक तकलीफ में सुधार नहीें। धारण किये थे रूद्राक्ष, नीलम,तथा सफेद पुखराज। सफेद पुखराज। पूर्व धारण की स्थिति में रूद्राक्ष द्वारा जांच की गई जिसमें शुक्र,सूर्य,मंगल नीचे,राहु तथा गुरू कुल पांच ग्रह एंटी होना पाया गया। उपरोक्त धारण किये गये सभी रत्नों को उतार कर रूद्राक्ष द्वारा जांच किये जाने पर सिर्फ सूर्य एवं गुरू दो ही ग्रह एंटी होना पाया गया। दोनों ग्रह का इलाज माणक धारण करने से होना बताया गया। धारक द्वारा कुछ दिन सिर्फ उतार कर जांच किया गया जिसमें काफी राहत मिली तथा फिर माणक धारण किया गया। और कुल १५ दिन के अंदर हेल्थ में भी काफी सुधार होना बताया गया। फोन नं. :- ०९९०७१८२६०७, ०७८८-२३५२२३८.

Tuesday, March 4, 2008

समानता में भिन्नता की खोज (ज्ञान)

समानता में भिन्नता का ज्ञान रूद्राक्ष द्वारा हो जाता है। जैसे:- हमारे दुर्ग भिलाई में कुछ ऐसे केस भी आये हैं जिनका जन्म स्थान एक जन्म समय दो चार मिनट आगे पीछे है तथा तिथि एक है। जिनके माता पिता एक है अर्थात् जुड़वां बच्चे है, इन जुड़वां बच्चों की जन्म कुण्डली भी एक जैसी है, दोनो की राशि ,नक्षत्र, चरण तथा बारह भावों में ग्रहों की स्थिति एक ही है। दोनों की भुग्‍त एवं भोग्य महा दशा भी एक है ग्रहों के अंश भी एक है। जब कि प्रत्यक्ष रूप से देखने पर दोनों के स्वभाव , आचार विचार , रूचि ,तथा समस्या भिन्न-भिन्न है। रूद्राक्ष द्वारा जांच के आधार पर रत्न की आवश्यकता भी दोनों की भिन्न-भिन्न निकलती है, दोनों बच्चों को रूद्राक्ष जांच परिणाम के आधार पर रत्न धारण कराये जाने पर दोनों को अनुकूल प्रभाव प्राप्त होते है। यदि कुण्डली में दोनों बच्चों का बोलता नाम अलग-अलग लिखा गया है, नाम पर ध्यान नही दिया जावे तो फलारेस कहने वाला कहेगा कि ये दोनों कुण्डली एक ही व्यक्ति की है। इस प्रकार के व्यक्तियों की दुविधा का समाधान रूद्राक्ष द्वारा जांच प्रयोग से रत्न धारण कराने पर आसानी से किया जा सकता है। इस जांच से जिनकी कुण्डली नहीं है ,उनकी भी समस्या का समाधान आसानी से किया जाना संभव हो पाता है। अनेकों ऐसे व्यक्ति है, जिनकी कुण्डली नहीं होती, और उनकी समस्या का निदान इस जांच द्वारा संभव हो सका है। इसी लिए कहते है -

पत्थर समझें,रत्नों से होता है चमत्कार ,

रूद्राक्ष दिखाये ग्रहों का आंखों देखा हाल,

जीवन बदले, करे हर सपना साकार।

Saturday, February 23, 2008

रुद्राक्ष प्रयोग : अनुभव

१. मै अलका बावशे फेन्गशुई मास्टर रेकी, क्रिस्टल मास्टर जिसने जीवन मे कभी भी हार न मानी । हमेशा अपने प्रयत्न व प्रयास, मेहनत से जीवन मे हर खुशियों को हासिल किया। इसके अलवा अपने कंुडली मे लिखी बातो को भी गलत साबित किया। मै स्वयं भी ज्योतिषी हुं। परन्तु जीवन मे कुछ ऐसी परेशानी थी जिसका उपाय करके भी पूर्णरूप से अच्छे परिणाम प्राप्त नही कर पा रही थी तब मुझे श्री नरेन्द्र कुमार अग्रवाल जी के बारे में जानकारी प्राप्त हुई और मैने उनसे मुलाकात कर रूद्राक्ष पध्दति द्वारा ग्रहो की सही स्थिति की जानकारी अपने हाथो पर व सही रत्न कौन सा पहनना चाहिए इसकी जानकारी हासिल की व कुछ रत्नो को धारण किया। १५-२० दिन के अंदर मैने परिवर्तन को महसूस किया व मुझे उन परेशानी से घुटकर भी प्राप्त हुआ । उसके बाद मैने अपने बेटे (अमूल्य) को भी जांच करवाकर रत्न पहनाया उसका स्वास्थ्य भी सुधर गया व मन की चंचलता कम हो गई। फिर मैने अपने आस -पास व मैरे स्टुडेण्ट (शिष्य) को लाया जिसमे वसुधा कपिला को तुरंत नौकरी मिल गई। मेरे भाई श्री अनिल चौरे जी डाँक्टर है। उसको भी तुरन्त फायदा हुआ। रूका हुआ काम २ घंटे के अंदर पूरा हो गया। मेरी बेटी कु. निधी बावेश जो १२वीं कक्षा में पढती है जिसका स्वास्थ्य हमेशा खराब रहता था जांच द्वारा पहने रत्नो को धारण कर पूर्णत: स्वास्थ्य को पाया उसका मन भी पढने मे लग गया है। और अच्छे अंको को प्राप्त कर रही है।

श्रीमती अलाका बावशे

ई.डब्लु.एस.-४९,५० विशाल नगर, (भिलाई)

मोब. नं.:- ९८९३५३४९५६,९२२९५८६२८०

फोन नं. :-०७८८-२३५६१५२,९३२९०२३४७६

२. मैं जोगेन्दर सिंह चावला प्रोवाइडर चावल किराया भंडार दुर्ग का वाशिन्दा हूं। मै अपनी जिन्दगी मै कभी भी कर्म के अलावा किसी पर भी विश्वास नही करता था। ग्रहो,नग इत्यादि को बकवास समझता था। पर जब मेरी परिस्थितया कुछ विपरीत हुई। मैं आर्थिक,सामामिक तौर पर पीछे जाने लगा। मन मे हतास दिल में विरक्ति सी छाने लगी। हर कार्य मै धाटा होने लगा। एक दम टूटकर रह गया। इस बीच मेरी नरेन्द्र अग्रवाल से मेरी मुलाकात हुई। इन्होने मुझे रूद्राक्ष एवं नगो,ग्रहो के बारे सतलाया । मै कभी भी विश्वास नही करता था । इसलिये मैने मना कर दिया । पर इन्होने मुझे टेस्ट हेतु १ नग दिया और कहा था कि इसका असर २-३ दिन मै पता चल जावेगा। २दिन बाद वाकई असर हुआ। और मुझे कुछ विश्वास होने पर इन्होने मुझे ४ नग नीलम,पन्ना,पुखराज वगैरा पहनाया। जिससे १५-२० दिन के अंदर फरक मुझे महसुस होने लगा। धीरे-धीरे मुझे वापस पुरानी स्थिति पर समय नही लगा। आर्थिक परेशनिया,मानसिक परेशानिया,घरेलुू परेशानिया मेरी दूर हुई। जिसके लिये मैं आजीवन नरेन्द्र कुमार का आभारी रहगा। और इनके जरिये मैं यह भी मानने लगा कि वाकई नक्षत्र,ग्रह इत्यादि का प्रभाव मनुष्य पर रहता है। जिसका निराकरण इसी से ही हो सकता है। मेंरी बिटिया की शनि ४-५ साल हो चुके थे। संतान नही थी। सो इन्होने जांचकर पुखराज पहनने को दिया । जिसके प्रभाव से एक माह इसकी यह इच्छा भी पूरी हो गई । जिसके लिये मै नरेन्द्र कुमार का आभारी रहूगा। भगवान से मेरी यही प्रार्थना है कि नरेन्द्र कुमार के हाथ में यश दे ताकि ये दिनो दिन इसी तरह लोगो के कष्ट दूर हो सके ।

जोगेन्दर सिंह चावला

चावल किराया भंडार दुर्ग

३. मैं उत्‍तरा मासूलकर १७-०८-०५ को मै नरेन्द्र जी अग्रवाल के पास आई तब मै बहुत ही परेशानी में फस गई थी परन्तु मै एक नग का धारण कि जिससे मंेरी बहुत बड़ी समस्या ट टल गई और दुसरी समस्या थी । १० वर्ष से तलाक का केश कोट मै चल रहा था उसमे मै जीत गई मेरे को अग्रवाल जी को पास से जो मै रत्न मै फयदा हुआ इसका दिल से दुआ देती हूं।

श्रीमती उत्‍तरा मासुलकर (वैभव लक्ष्मी)

जंयति नगर कर्मचारी नगर के शिव मंदिर के पास दुर्ग मो.नं.-९८२७९२५७८१

४. मै किरण दूबे काफी परेशान थी अपने पति व खासतौर से सास से दिमाग काम ही नही करता था । परन्तु नरेन्द्र अग्रवाल अंकल के पास आकर नग पहन कर मन कि शांति हुई है। तथा दिमाग कि काफी हद तक काम कर रहा है। तथा रूका काम होने लगे नग का असर २४ घंटो में ही पडने लगा था। तथा मेरी बहन (कंचन मिश्रा) का दिमाग भी अंशात रहता था। पढ़ाई और शरीर में भी समस्या होती थी परन्तु नग पहने के बाद शांत रहता है। तथा शरीर में सुधार हो रही है।

किरण दुबे

एन.पी.मिश्रा ८/१३ सुपेला भिलाई (छ.ग.)

मो.नं.- ९३००६०२९८३


५. मैं आशीष कुमार उईके शंकर नगर दुर्ग मेरा एक्सीडेन्ट दो साल पहले हुआ था और मै दर्द के मारे बहुत परेशानि मे था ऐसे मे मुझे श्री मान मानणीय नरेन्द्र अग्रवाल जी ने सलाह दिये कि आप रूद्राक्ष पध्दति से जांच करवाये और आपको जो रत्न सुट करे वो रत्न पहनीये आप की परेशानि जरूर कम हो जाएगी और मै आया सही में बहुत खुश हूं श्री मान अग्रवाल जिसंे मेरी मुलाकात उन्ही के दुकान के काम पर हुई मै उस काम पर सुपरविजन करता था और मैने मेरे मित्र सरोज कुमार देवांगन को भी इन से मिलया था और उन्होने भी टेस्टींग कर के रत्न प्राप्ती कर इस का लाभ उठाया इस सलाह से मेरा जीवन सुखी हुआ है। और मै आज बहुत खुश हूं।

आशीष उईके शंकर नगर दुर्ग (छ.ग.)


६. मै जी.के. निहानिया श्रम निरीक्षक दुर्ग में निवास करता हूं मैं कई दिनों से ही अग्रवाल के पास अपनी पत्नी की समस्या जो कि मानसिक रोग से पिडीत थी उनकी जांच कर बातये गये सुझाव अनुसार रत्नों का धारण कर काम पर गया जिससे उन्हे चौथे ही दिन आर्थिक रूप से प्रभाव दिखाई दिया । एवं ६वे दिन दुसरा रत्न धारण करने पर काफी मात्रा में लाभ प्राप्त हुआ । एवं अभी भी लगातार लाभ प्राप्त हो रहा है। मुझे भी लगातार रत्न धारण करने से स्थानान्तरन की कार्यवाही मे लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है।

जी.के. निहानिया मो.नं.-९८२६३६५३०१


७. मै राजेन्द्र कुमार शर्मा (राजस्थान) का जयपुर जिले का रहने वाला हूं। जमवारामगढ़ तहसील गॉंव खरड़ का रहने वाला हूं। मै श्री मान नरेन्द्र जी अग्रवाल जी से टेस्ट करवा के जो रत्न बताये अनुसार धारण किया जो आठ में शांति हुई है जो मुझे ३६साल में नही हुई सो मुझे विश्वास है। `` प्रत्येक्ष में प्रमाण की जरूत नही है।``

राजेन्द्र कुमार शर्मा (राजस्थान)

८. नमस्ते सर मेरा नाम गोविन्द राम है,मुझे तीन दिनों में बहुत अच्छा लगा है। आप ने जो दिया है, उससे मुझे बहुत अच्छा महसुस हुआ बोले तो १००प्रतिशत में ५०प्रतिशत अच्छा लग रहा है। अभी मुझे जादा कुछ नही सिर्फ श्वास की तकलीफ लगता है। पहले मुझे बहुत आलस लगता था। जब से आप से मिलकर आया हूं। बहुत अच्छा लगता है। और जादा आलस भी नही लगता ।

गोविन्द राम साहू

९. मैने दिनांक ७/३/०६ को अगुठी बनाकर मोती नामक नग बनाकर दाहिने हाथ की छोटी अंगुली में पहना जिससे मुझे बहुत राहत एवं फायदा हुआ मेरा प्रहलाद कुमार अंगुरे है जो नाम राशि पर बनाया गया था। मैने अपनी पुत्री कु. ममता को भी एक नग माणिक नाम से अंगुठी बनवा कर १६/७/०६ को पहनी थी जिससे उसे शांति तो मिली एवं पढाई मेंे भी लग गई है जो पहले विद्रोह रूप में थी आज एक माह हो चुका है बहुत शांत हो गर्ड आगे और फायदा होता दिखाई दे रहा है तथा मैने अपनी पत्नी शारदा देवी के लिये एक अगुठी बनाया इसलिये कि वह बहुत घबराती थी अपने आपसे डरती थी जो अगुठी धारण करने के बाद दो माह मे इतना परिवर्तन आया कि किसी भी व्यक्ति से निडरता पूर्वक बात करती है। अब उसे पुछने पर कहती है कि किसी प्रकार का डर नही है घबराहट भी बहुत कम हो गई है।

प्रहलाद कुमार अंगुरे

पोस्टींग अण्डा थाना


१०. मैं अपनी बडी पुत्री की परेशानियों की निराकरण
,निधन के लिये आदरणीय पल्ले ताम्रकार को बताया उसने मुझे परम आदरणीय श्री एन.के.अग्रवाल जी के पास रत्नों से इलाज एवं समस्याओं के निदान के लिये भेजा श्री अग्रवाल जी ने जॉच कर मेरी पुत्री को पन्ना रत्न उनकी पढ़ाई में एकाग्रता के लिये धारण करने के पश्चात् मेरी पुत्री से पढ़ाई में एकाग्रता एवं रूची बढ़ गई हैै। अत: मै अनुभव किया की कुछ ही समय (सप्ताहभर) मै ही अच्छा लाभ मिला इसलिये हमे अच्छे मार्गदर्शक कें अनुसार रत्नों को धारणकर बताये गये विधान से अपनी समस्याओं का निदान मिल जाता है। रोशन लाल वर्मा

जवाहर नगर दुर्ग

मकान नं. १२२

फोन नं. ०७८८-२२१६३१७


११. मैं दीपक कुमार यादव (पेन्टर) पचरी पारा निवासी जो कि काम और आदमियों से परेशान रहता था । जो कि श्री एन.के. अग्रवाल जी के पास से मोती रत्न धारण कर १२/१०/०६ धारण किया दिनांक १३/१०/०६ को सुबह पूजा करके धारण किया उसी समय से काम चालू हुआ रूका हुआ काम खत्म हुआ और मेरे वर्कर आना चालू हो गया और सुख शांति महसूस किया ।

दीपक पेन्टर पचरी पारा दुर्ग

१२. मैनंे पुष्षक बाकलीवाल नरेंन्द्र अंकल से अकीक पेहना और फिर क्या बस हर काम होता ही चला गया । वैसे तो मैं एक छात्र हॅंू और मेरा काम है मेरी पढ़ाई रत्न पहनने कंे बाद मुझेमें आत्मविश्वास आया और मैने १२वीं में ९३ प्रतिशत लाकर छ.ग.कामर्स टॉपर बन कर दिखाया । इसके बाद मैने सी.ऐ. करने का सोचा और नागपुर चला गया । परिस्थितियॉ ना हो के बावजूद मेरे किसी भी खर्च मे रूकावट नही आई । और आज इन सब चीजों के लिए मैं नरेन्द्र अंकल को शुक्रिया अदा करता हूं।

पुष्षक बाकलीवाल

एस. के बाकलीवाल आनाज लाईन

हाटरी बाजार दुर्ग

मो.नं.:-९८२७१८०५३५

13. मै किरण कुमारी साहू उम्र २८ साल है। मैं बहुत दिनों से अपनी शादी के बारे में चिंतीत थी । और मेरी शादी बहुत दिनों से लग नहीं रही थी । यहॉ अग्रवाल जी के पास आने से मेरी चिंता दूर हो गई । उन्होने ने मुझे राशी रत्न धारण करवाया जिसके एक साल के अंदर मेरे शादी हो गई । अत: मै पंडित अग्रवाल जी की बहुत आभारी हूं।

किरण कुमारी साहू

सुभाष नगर दुर्ग छ.ग.

फोन नं. ०७८८-२२११३४६

१४. आधुनिक से परिपूर्ण इस कलयुग मे ज्योतिषि भविष्यवक्ताओं की कतार लगी हूई है ऐसे समय में जब जीवन को सकारात्मक दिशा देने मानव मन प्रतिदिन किस तरह भठक रहा है। इसका ज्ञान स्वयं मानव को नही होता है लेकिन सच्ची श्रध्दा से किये गए सदकर्म ईश्वरी प्रेरणा से सच्चे व्यक्ति को सही राह दिखा देते है। मै अनमोल सुखदेवे शंकर नगर दुर्ग मैने जब से यह मोती पहना सबसे मुझे बहोत फायदा हुआ है । और मुझे जो परेशानी थी वो भी कम हुई है इस मोती का असर मुझे ८० प्रतिशत फायदा है। मै ईश्वर से यह कहूंगा कि नरेन्द्र कुमार जी अग्रवाल को भविष्य में और सफलता मिले । धन्यवाद!

अनमोल सुखदेवे

शंकर नगर दुर्ग


१५. मैं पेशेवर पत्रकारिता व्यवसाय से पिछले १८ साल से सक्रियता से जुडा हूं । जीवन में अनेेक भविष्यवक्ताओ के संपर्क में आया लेकिन रत्न कांे लेकर किसी पर विश्वास नही किया । श्री नरेन्द्र जी अग्रवाल के संपर्क में जब आया उस समय मै आकाश चैनल के समाचार अभी अभी टी.वी. न्यूज में बतौर वरिष्ठ रिपोर्टर कार्यरत था। रत्न परामर्श विघा इन्होने मेरे सामने प्रारंभ करने के पूर्व कई वर्षा तक शोध किया जिससे उपस्थितजनो को बहुपक्षीय लाभ मिलते रहे कीमतें रत्नों को उतारकर सामान्य रत्नों से जीवन दिशा बदलने की काबिलियत अग्रवाल जी में है सचमुच ईश्वरीय चमत्कार है कि रूद्राक्ष द्वारा सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव का तत्काल पता लगाना । मुझे कई रत्नों को धारण करवाने के बाद कीमती रत्नो को उतारने का सुझाव दिया । मेरे पेशे मे रत्न परामर्श का लाभ नित्य प्राप्त होता है मै रत्न परामर्श प्राप्त करने पहूंचे जिज्ञासु लोगो को बताना चाहता हूं कि वे रत्न धारण करने के बाद सकारात्मक सोच रखे लाभ अवश्य प्राप्त होगा। आगे ......

जाको राखे साईया ,मार सके न कोय ,

बाल न बाका कर सके

जो जग बैरी होय ।।

संदीप श्रीवास्तव पद्मनापपुर

(टी.वी.न्यूज पत्रकार )


१६. ``देने वाला मै नही ऊपर बैठा मै सिर्फ मार्ग दर्शन देने के साथ मुसीबतों से घीरे लोगो को सही रत्नों के माध्यम से उनकी परेशानिया दूर करता हूं। यह बात बिल्कुल सही है क्योंकि पेशे से पत्रकार होने की वजह से मै जल्दी किसी पर यकीन नहीे कर पाती थी लेकिन नरेन्द्र जी द्वारा रूद्राक्ष के माध्यम से हाथ को जॉच उपरांत उन्होने गोमेद पहनने को कहा । पहनने दूसरे दिन से ही मुझे अपनी आत्मशक्ति में बढ़ोतरी के साथ अपनी बातों को ले डामा डोल की स्थिति से बाहर आने लगी । इसके साथ ही मेरे रूके हुऐ धनों की वापसी भी शुरू हो गई । इससे लगता है कि रत्न आप की सोच व जिन्दगी की दिशा जरूर बदल देते है।

कुमारी संध्या जनसत्‍ता प्रेस ,दुर्ग

(च्ण्ळण्पद श्रवनतदंसपेउ तिवउ ठवउइंल) (ड। स्ण्स्ठ)

मो.नं.:-९४०६०१२७८६

१७. मेरे रत्न धारण करने से पहले मेरी कई प्रकार कि समस्या थी । जिन से टेन्शन लेना ,पैसे आवक से ज्यादा जावक थे कुछ स्वयं कि समस्या थी जिन में से अभी २०-२२ दिन के उपरान्त जब से मैने रत्न धारण किया है मेरी मनोबल मे वृद्धि हुई हैे पहले के उपरान्त मै अभी काफी टेन्शन र्फी रहता हूं कि मनोबल बढ़ने से मै अन्य समस्यााओं को दूर कर सकु।

रूद्र डे एम.पी.एच.बी. (एन्टीरियर डेकोरेटर)

कैलाश नगर भिलाई

मो. नं.:- ९८९३२५१२११

१८. मैं करीब एक महीने पहले नरेन्द्र अंकल के पास आयी थी ,मुझे कुछ मानसिक एवं शारीरिेक परेशानी थी मैने उन्हे बताया तो उन्होने मुझे एक अगुठी दिया जिससे मुझे काफी फर्क हुआ कुछ परेशानियां भी थी उसमे भी मुझे फॅर्क नजर आया तो मुझमे आत्मविश्वास बढ़ा ,और आत्मबल मिला म। काफी संतुष्ट हूं । मै उनका आभार मानती हूं। ईश्वर से कामना करती हुं। जैसे मुझे संतुष्टि मिली है वैसे ही सबको संतुष्टि मिले ।


१९. मैं स्मीता कौर पदम काफी समय से अपने निजी जीवन से परेशान थी बाद में मुझे नरेन्द्र अग्रवाल जी के बारे में पता चला व उनसे संपर्क किया । उन्होने मुझे एक रत्न दी तथा उसे धारण करने के बाद मेरे जीवन में काफी सुधार हुआ साथ ही साथ मेरी पी.एस.सी. के अध्ययन में भी सहायता मिली । मैं काफी खुश हूं । तथा सब से यही निवेदन करूगीं की नरेन्द्र अग्रवाल जी से मिलकर सभी जन को अपने जीवन का सही मार्गदर्शन लेना चाहिए। धन्वाद!

स्मीता कौर पद्म ४२१

मोहन नगर दुर्ग

मों.नं.:-९३०१००२००७


२०. भाई नरेन्द्र अग्रवाल जी द्वारा मेरे को जॉच करके एक रत्न की अंगुठी बनवाकर पहनाने से २४ घंटे के अन्दर मानसिक शांति एवं पारिवारीे शांति में अद्भूत चमत्कार हुआ है इसके लिये मै भाई नरेन्द्र जी अग्रवाल को बहुत धन्वाद देता हूं । आशा है आगे भी ऐसा ही सहयोग सबका करते रहें।

रूपचन्द जैन

पधनाभपुर दुर्ग

मोब.नं.:-९८२७१०७५९४


२१. मैं सुनील कारिया कुछ समय पूर्व अपने लिये राशि का पेंडल जिसमें तीन रत्न लगे हुये थे जोधपुर राधपुर राजस्थान से मंगाया था और फिर उसे धारण किया धारण करने के एक सप्ताह बाद से प्रभाव महसुस होने लगा।जिससे धीरे धीरे व्यापार मदां होने लगा । मै बहुत परेशान हो चुका था फिर मुझे श्री नरेन्द्र जी अग्रवाल के बारे में पता लगा तब उनके पास जाकर रूद्राक्ष द्वारा जांच कराया उक्त जांच से बताया गया कि मुझे सिर्फ पुखराज पहनने से फायदा होगा और मैने पुखराज धारण किया धारण करने के बाद एक ही रात में मेरा तनाव काफी हद तक समाप्त हो गया था लगभग १५ दिनों कंे बाद मै पुन: अग्रवाल जी के पास गया और व्यापार में प्रोग्रेस हेतु रत्न देने को कहा दुबारा जांच करके मोती धारण करवाया गया मोती धारण के बाद अब मेरा व्यवसाय अच्छे रूप से चलना शुरू हो गया । और मै खुश हूं । इस जांच से मैने यह अनुभव किया कि एक मुश्त अनेक नगो का धारण करना नुकसान प्रद होता हैं मै इस जांच के लिये अग्रवाल जी को धन्वाद देता हूं।

सुनील कारिया

च्वसेंल बीवूाए ैजंजपवद त्वंकएक्नतह

मोब.नं.:-९८९३०६३९२९

२२. मै पं.शिव दयाल शास्त्री अपनी धर्म पत्नी श्री मती कौशल्या देवी शर्मा जो ३वर्ष से अपने शरीर के पीड़ा से बहुत परेशान थी जब में डा. के द्वारा कई प्रकार का इसके शरीर के लिये दवाईयां करवाई लेकिन दवाई के समय तक ठीक रहती फिर वही परेशानियों द्वारा दुखी रहती थी जब मै श्री मान नरेन्द्र जी के द्वारा जांच करवाया रूद्राक्ष के द्वारा तक से पूर्ण तथा शरीर से अब ठीक है। इनकंे द्वारा १रूद्राक्ष एवं अंगुठी के पहनने के बाद से चार पांच दिन के बाद अपना असर प्रारंभ हुआ है। यह शत् प्रतिशत विसवास वाली बात है। किसी प्रकार की हेर फेर नही है।

पं.शिवदयाल शास्त्री

ज्योतिष परामर्श केन्द्र खण्डेलवाल कालोनी ,दुर्ग

मों नं.:- ९८२७१८८८२४

फोन नं.:- ०७८८-२३२९४७४

२३. मैं श्री अस्तीर साहू मुझे कुछ दिनों से परेशानी हो रही थी दिनांक १६.०५.०७ को नरेन्द्र कुमार अग्रवाल से रूद्राक्ष से जांच कराया था उन्होने मुझे मुंगा पहनाया दिनांक १७.०५.०७ को उस के बाद मुझे २०.०५.०७से काफी हलका लगने लगा अब मुझे कोई परशानी नही महसुस हो रहा है।

अस्तीर साहू

नया पारा दुर्ग वार्ड क्र.(१)

मो.नं.:-९८२७१५०३७७

२४. मै राजेश कुमार बारस्कर भिलाई श्री नरेन्द्र अग्रवाल जी साहब से रत्न धारण करने के सम्बन्ध मे चर्चा की। इसके लिये मुझे रूद्राक्ष से हाथ जांच करने पर पाया कि जो रत्न नीलम ,गोमेद,एवं लहसुनिया धारण तथा लोहे का रिग मै धारण किये हुये था उससे मुझे अत्यधिक तनाव महसुस हो रहा था ,ततपश्चात सभी रिंग उतारने के बाद मुझे काफी राहत महसुस हुई। यह रूद्राक्ष पद्धति अत्याधिक महत्वपूर्ण एवं लाभदायक हो जिससे रत्नो के प्रभाव एवं उसके कार्यो का बहुत ही आसानी अनुमान लगाया जा सकता है एवं अपने कल्याण के लिए अति उपयोगी सिद्ध होता है। मेरे द्वारा कुल चार रिंग धारण किये हुये थे जिसे जांच द्वारा हानिकारक होना पाया गया और परामर्श के अनुसार उसे १घंटे से ही आराम महसुस होने लगा।

राजेश कुमार बारस्कर

क्वा.नं. २/सी सडक २६

फोन नं.:-९८२६५१८९९७

२५. मै श्री मति निर्मला द्विवेदी जो कि मै लगभग एक साल से मानसिक रूप से परेशान थी एवं भारी मात्रा मे तनाव रहता है । घर में परेशानी बढती थी मुझे कुछ लोगो से पता चला कि श्री नरेन्द्र अग्रवाल जो रूद्राक्ष द्वारा जॉच किया करते है । आप वहा जाकर जांच करावे मैने विश्वास से श्री नरेन्द्र अग्रवाल जी के पास २९/६/०६ को दिन गुरूवार को दोपहर ४बजे के लगभग आई थी जांच रूद्राक्ष द्वारा किया गया उसमे सही जानकारी बताई गई एवं रत्न पहनने को बताया गया ।सुनैला पहने को बताया गया एवं तुरन्त बनाकर ६ बजे शाम तक पहना गया एवं मुझे पहनने से बहुत अच्छा लगरहा है। एवं तनाव कम हो रहा है। मै आज २३/६/०६ को आकर बताई एवं मै अभी ठीक हूं।

निर्मला द्विवेदी जवाहर नगर दुर्ग

मो.नं.:-९३०३१०७९४६,९८९३८३२३६३

2६. आज दिनांंक १९/१०/०७ को मै दोबारा श्री नरेन्द्र अग्रवाल जी के पास आया उन्होने मुझे आज मोती रत्न धारण करवाया करने के पहले मुझे श्री नरेन्द्र जी ने मुझे गोमेद रत्न धारण करवाया था तब भी अच्छा लगा था ,आज भी मोती धारण करने के बाद अच्छे समय का अन्दाजा लगने लगा है।चाहे बैठे हुए फोन पर ही क्यों न कोई अच्छी खबर आई हो बाकी आगे जैसी भगवान की इच्छा होगी वैसा ही होगा। धन्यवाद!

नरेश बजाज

पुराना राजेन्द्र नगर रायपुर

मो.नं.:-९४०६०५१६९०

२७. मैं तरूण कुमार मजुमदार जो की मै ओपेल स्पेन धारण किया था जो कि अनावस ही था । उसको पहनने से टेंनशन ज्यादा था । जो कि अब उस स्टोन को उतरवाने के बाद अब मुझे थोड़ा बेहतर महसूस हो रहा है। आगे थोडे दिन बाद तक देखने की उम्मीद है।

तरूण मजुमदार

आकाश नगर रोड़ सिकोला भाठा दुर्ग

मो.नं.:-९८२७१९१०२५

२८. मैं विजय कुमार सिंह मेरा को बिजनेस ठीक से नही चल रहा था । पति पत्नी का झगड़ा चलना काम के प्रति मन नही लगना अग्रवाल जी से मैने जांच करवाया तीन मुर्ति अंगुठी कंे पहनने से मुझे काफी फायदा हुआ हैैै। और आगे भी मिलेगा ऐसी आशा करता हूं।

विजय कुमार सिंह

बी.एम.वाय. चरौदा

मों नं.:-९८२६७४८५९२


२९. माननीय श्री अग्रवाल जी के सहयोग से मेरी पुत्री का विवाह अच्छे परिवार में हुआ इसके कियंे हम श्री अग्रवाल जी के अभारी है। उनका सहयोग सराहनीय था । धन्यवाद!

श्रीमति ए.गुप्ता

आर्य नगर दुर्ग

फोन नं.:-०७८८-२३२८९७०

३०. मैने १२दिनांक ०७ को अग्रवाल जी से सहयोग प्राप्त करके नग धारण किया । १५दिनांक ०७ से ही मुझे बहुत अच्छा लगा । और आज मानसिक शांति जो प्राप्त हुई है। उतनी पहले नही थी और मुझे पूरा भरोसा है कि हम भविष्य मैं ऊॅंचाईयों पर जायेगें मैं अग्रवाल जी की आभारी है मेरी शुभ कामनाये उनके लिये पूरा है। ईश्वर उन्हें तरक्की दें ।

श्रीमति कमलजीत कौर

वसुधा परिधान,सिंधी कालोनी दुर्ग

उप प्राचार्य खालसा स्कूल दुर्ग

मो.नं.:-९४२५५५२७८९.

३१. मैनें मेरी पहली के हाथ में श्री नरेन्द्र कुमार अग्रवाल जी से रत्न की जॉच करवाकर अक्टूबर माह में अंगुठी पहनाई थी उस के कारण ६माह में अभूतपूर्ण असर हुआ थाइराइड के कारण जो वजन अत्यधिक था उसमें १३ किलोग्राम कम हुआ है। मैने मेरे पुत्र को भी रत्न धारण करवाया था जिससे अब उसका मन पढ़ाई में लग रहा है और वह अब अपने आप ही पढ़ाई करता है। इससे पहले उसका ध्यान पढ़ाई में केन्द्रित नही होता था । इसके लिये मै नरेन्द्र जी अग्रवाल को धन्यवाद देता हूं।

श्री सर्वजीत सिंह

क्यू.यू.नं. :-८बी

एस.टी.नं.:-एस.पी.ए.

सेक्टर ५ भिलाई मों.न.:-९३००६६१८७४ं

३२. मैं संजय चक्रवर्ती मुझे जीवन में बहुत सी परेशानी थी । जैसे कि किसी भी काम में बाधा आना बिना कारण पैसा खर्च होना किसी भी काम को लेकर परेशान होना दिमाक स्थीर ना रहना। ऐसी बहुत सी परेशानी थी । मैने अपना सारी परेशानी श्री नरेन्द्र कुमार अग्रवाल जी को बताया उन्होने मेरा हाथ देखा और मुझे पन्ना रत्न धारण करने को कहा मैने रत्न धारण किया और सिर्फ १४ दिनो के भीतर इसका असर होने लगा और मै अब परेशानी से दूर हूं। और अपने आप को शांत महसुस कर रहा हॅंू। संजय चक्रवर्ती

धनलक्ष्मी नगर भानपुरी रायपुर

मो.नं.:-९८२७१६१४४३,९३०२४०८९२२

३३. आज दिनांक ०३/०९/०७ को मुझे अग्रवाल जी कंे निर्देशानुसार मैने अंगुठी धारण किया। जिसके परिणाम स्वरूप मुझे ४८घंटे के अंदर शांत लगना शुरू हो गया । अर्थात मेरी जो मानसिक स्थिति विचलित हो रही थी उसमें स्थाईत्व आना शुरू हो गया ,काम से घर जाने पर जो थकावट महसुस होती थी उसमें कमी आने लग गई। और भी ऐसे अन्य टृष्टिकोण से मै बहुत अच्छा महसुस कर रहा हूं। अभी ०३/०९/०७की स्थिति में मुझे थोडा सा सुबह शाम मस्तक में दर्द महसुस होता है। हालाकि मुझे मस्तक दर्द की समस्या बहुत पहले से है जिसके लिए मैने डॉक्टर ईलाज भी करा चुका हूं।

गुलाब चंद साहू

ग्राम पुलगांव ,वार्ड नं. ५४

मोब.नं.:-९८२६९९६४३१

कार्य स्थन बाल श्रमिक शिक्षक

संस्कार बाल श्रमिक शाला सिकोला भाठा दुर्ग

३४. रात दिन मानसिक एवं शरीरिक अस्वस्थता के कारण थोडा परेशान था। इसी दौरान मैं श्री नरेन्द्र जी अग्रवाल जी से मिला तथा धारित रत्नों की रूद्राक्ष से जांच कराई । जांच के बाद श्री अग्रवाल द्वारा मुझे सलाह दी गई कि आप ने जो रत्न धारण किये है वे आपको हानि अथवा तनाव को ला रहे है। इसके स्थान पर जांच उपरांत सीलोन धारण किया। इससे मुझे बहुत राहत मिली । तनाव भी काफी कम हो गया। इस हेतु मैं ह्दय से अग्रवाल जी एवं उनकी अनोखी रूद्राक्ष के माध्यम से जांच प्रक्रिया का आभारी हूं।

अनिल जिला व्यापार एवं उघोग केन्द्र दुर्ग

एम.डी.८ पधनाभपुर,दुर्ग मोंनं.:-९८९३१६०२३२


३५. प्रश्न:- नरेन्द्रकुमार अग्रवाल द्वारा - बाफानाजी आप व आपकी धर्म पत्नी की रूद्राक्ष जांच करीब बीस दिन पूर्व मैने किया था और उस समय आप तीन अंगूठी धारण किये हुए उसे उतराकर आपको एक दूसरा रिंग धारण कराया तथा आपकी पत्नी हीरे धारण की हुई थी तथा वे अस्थमा एवं बी.पी. सूगर से ग्रसित है। उन्हें वे सभी हीरे के गहने उतरा दिये थे उसका क्या अनुभव रहा हैघ् उत्तर:- रूद्राक्ष के माध्यम से जांच पघति मैंने पहली बार देखा जिससंे मैं बहुत प्रभावित हंू। जिससे मैं और मेरी पत्नी आपके निर्देशानुसार सब रत्नों को उतार दिया तथा बिना रत्न वाले आभूषण धारण कर लिया और मैं निश्चित रूप से कह सकता हंू कि आपका रत्नों का रूद्राक्ष परीक्षण मुझे प्रभावित किया और प्रशंसनीय है, और इस जांच के आधार पर धारण से कई प्रकार के आंशिक प्रभाव महसूस हो रहे हैं।

पी.सी. बाफना पूर्व विधायक भिलाई सीनियर सी.ए. दुर्ग

ओफ. गंज पारा दुर्ग आर.ई.एस.: ५ मालवीनगर

फोन नं.:-०७८८-२३२३१८२,२३२९७३८,

मों नं.:-९८२६३९३१८२,९२२९२०५९०५

Friday, June 1, 2007



Wednesday, May 30, 2007

रूद्राक्ष प्रयोग : रत्न परीक्षण का आधार (ज्योतिष)







विश्व के प्राय: हर देश में रत्नों के लिए स्वाभविक आकर्षण प्रारंभ से रहा है । रत्नों के लुभावने रंग व आभा समूचे संसार का मन भावन रहा है । रत्नों का प्रयोग आभूषणों के लिए प्राचीन काल में होता था किन्तु ज्योतिषीय मतों के अनुसार उसमें निहित दैवीय प्रभाव नें मनुष्य को उसके प्रति आकर्षण को और बढा दिया है । इसी के कारण आजकल १०० में से ८० व्यक्तियों के हांथों की उंगलियों में रत्नजडित अंगूठियों को देखा जा सकता है ।ज्योतिष के सिद्धांतों पर यदि हम विश्वास करें तो रत्नों का प्रभाव मनुष्य के जीवन में पडता है । रत्न मनुष्य को उसके जन्म कालिक ग्रहों की स्थितियों एवं वर्तमान काल की ग्रहीय स्थितियों के अनुसार फल देते हैं । विवादों के बाद भी यह माना जा रहा है कि रत्नों के धारण करने मात्र से समयानुसार आने वाली मनुष्य की परेशानिया कम या समाप्त हो जाती है । इसी के कारण व्यावसायिक ज्योतिषियों के खजाने भरते जा रहे हैं । रत्नों के प्रति हमारे रूझान में वृद्धि प्रतिस्पर्धा, बीमारी, वैवाहिक कलह व असंतोष के कारण ही बढा है ।मनुष्य को कब कौन सा रत्न धारण करना चाहिए इसके संबंध में ज्योतिष में सिद्धांतत: दो आधार माने गये हैं एवं उन्हे मान्यता भी प्राप्त है जिसमें से सर्वप्रथम आधार कुण्डली है, कुण्डली तात्कालिक ग्रहों की स्थिति को बताने का एक साधन है, ज्योतिष कुण्डली के ग्रहों की स्थिति के अनुसार पहले जातक की परेशानियों का अनुमान लगाता है फिर वह परेशानी किस ग्रह से संबंधित है यह भी अनुमान लगााता है एवं अनुभव के आधार पर व्यक्ति को रत्न धारण करनें का सुझाव देता है । दूसरा आधार - हांथों में ग्रहों की स्थितियों का अघ्ययन कर रत्नों का चयन किया जाता है ।अभी तक इन्ही दो आधारों के दवारा रत्नों का सुझाव दिया जाता रहा है किन्तु हमें विगत दिनों एक चौकाने वाली जानकारी हांथ लगी जिसमें रत्नों के चयन की एक नयी पद्धति के संबंध में पता चला । हम आपके समक्ष उसकी जानकारी रखना चाहते हैं । यथा -छत्तीसगढ के लौह नगरी दुर्ग-भिलाई के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं एक भव्य शापिंग माल के मालिक हैं नरेन्द्र कुमार जी अग्रवाल । इनके पास रत्न चयन के संबंध में एक अनोखा ज्ञान है जो ईश्वर प्रदत्त है । अग्रवाल जी यह कार्य स्वांत: सुखाय रूप से करते हैं यह कार्य उनका व्यवसाय नही है, वे जिसे रत्न धारण करना हो उसके हांथों के उपर मोली धागे में पेडुलम की तरह लटकते रूद्राक्ष के दवारा व्यक्ति को किस रत्न की आवश्यकता है यह बतलाते हैं । अग्रवाल जी इस पद्धति को रूद्राक्ष प्रयोग कहते हैं जो उन्हे दैवीय रूप से प्राप्त है एवं हजारों व्यक्तियों के दवारा इसका परीक्षण प्रयोग किया जा चुका है जिसमें वे सफल हुए हैं । इस बात की सत्यता की जानकारी उनके कार्यालय के विजिटर्स बुक में लिखे विभिन्न व्यक्तियों की टिप्पणियों में देखा जा सकता है जिसमें देश से ही नही विदेशों के रहवासियों के संदेश लिखे हुए हैं एवं उनके दवारा भेजे गये पत्र भी उसमें लगे हैं ।अग्रवाल जी हांथों के उपर रूद्राक्ष को घुमातें हैं एवं विभिन्न प्रकार के रत्नों को बारी बारी से उंगलियों के उपर रखते हैं जिसमें पंेडुलम रूद्राक्ष में तीन स्थितियां निर्मित होती है जो रत्न धारण का आधार होता हैं । पहली स्थिति रूद्राक्ष का क्लाक वाईज घूमना जो बतलाता है कि उक्त रत्न व्यक्ति के लिये उचित है । दूसरी स्थिति एंटी क्लाक वाईज घूमना जो यह बतलाता है कि वह रत्न उस व्यक्ति के लिए अनुचित है । तीसरी स्थिति पेंडुलम की स्थिति होती है जो यह बतलाता हैं कि उक्त रत्न व्यक्ति को कोई खास प्रभाव नही डालेगा । अग्रवाल जी हंथेली के अलग अलग जगह में अलग अलग आवश्यकताओं के अनुसार रूद्राक्ष प्रयोग करते हैं । यहां इस बात पे आश्चर्य होता है कि बिना कुण्डली देखे इनके द्धारा धारण करवाया गया रत्न ज्योतिषीय गणना के अनुसार भी सौ प्रतिशत फिट बैठता है । यह प्रयोग उनके लिए तो वरदान साबित हो सकता है जिनके पास अपनी जन्म कुण्डली नही है जबकि जिनके पास कुण्डली है पर अशुद्ध गणना के अनुसार वह सही नही है ।अग्रवाल जी नें हमें चर्चा के दौरान यह भी बतलाया कि उन्होंनें कई व्यक्तियों को उनके दवारा पहने गये महंगे रत्नों को उतरवा कर हल्दी के गांठ व तांबें के अंगूठी पहनवा कर भारी से भारी संकट को टलवा दिया है । उनका मानना है कि रोगग्रस्तता का महत्वपूर्ण कारण अज्ञानता एवं विलासिता के लिए हीरे एवं अन्य मंहगे व इमिटेशन आभूषणों को बिना जाने समझे पहनना है । उनका कहना है कि प्रत्येक रत्न मनुष्य के जीवन को अच्छा या बुरा प्रभाव देता है चाहे वह रत्न हो, उप रत्न हो या रंगीला पत्थर । इसलिए कोई भी रत्न पहनने के पहले उसे अपने उपर आजमा लेना चाहिए फिर उसे पहनना चाहिए ।अग्रवाल जी रत्नों के चयन एवं धारण करने के लिए जो प्रक्रिया अपनाते हैं वह दिखने में सामान्य सा प्रतीत होता है पर उनके दवारा बताये गये रत्नों को ज्योतिषीय आधार पर बार बार परीक्षण किया गया है और वह पूर्णत: खरा उतरा है ।ज्योतिष के अनुसार रत्नों के चयन में जो मूलभूत प्रक्रिया अपनाई जाती है उस पर मैं संक्षिप्त में प्रकाश डालना चाहता हूं । ज्योतिषियों की भाषा में तीन तरह के रत्नों का उल्लेख प्रमुखत: होता है और ज्योतिषियों के द्धारा मुख्यत: किसी व्यक्ति को इन्ही आधार पर रत्न धारण करने की सलाह देता है -जीवन रत्न - यह मनुष्य के लग्न भाव के आधार पर तय किया जाता है ज्योतिषियों की मान्यता है कि इस रत्न का धारण मनुष्य अपने जीवन पर्यंत कर सकता है । जीवन रत्न मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारता है एवं उसके जीवन को प्रभावशाली व स्वस्थ रखता है ।भाग्य रत्न - इसके चयन का आधार भाग्य भाव या नवम स्थान होता है यह मनुष्य के सामयिक विकास में कर्म के साथ मिलकर सफलता की संभावनाओं में वृद्धि करता है यानी यदि आप अपने भाग्य को प्रभावशाली बनाना चाहते हैं अपने चिंतन के अनुरूप करना चाहते हैं तो भाग्य रत्न को घारण किया जा सकता है ।दशानुसार रत्न - उपरोक्त दोनों सामान्य स्थितियों के रत्न चयन का आधार जन्म कुण्डली होता है ।दशानुसार रत्न का चयन वर्तमान परिस्थितियों में इच्छत फल प्राप्ति के लिए जन्मगत एवं गोचरगत ग्रहीय स्थितियों के अनुसार रत्न का चयन किया जाता है ।उपरोक्त आधारों पर जन्म कुण्डली के परीक्षण में यदि संपूर्ण गणना एवं सिद्धांतों को ध्यान में नही रखा गया एवं भावगत राशियों एवं भाव में बैठे ग्रहों के आधार पर रत्न धारण करवा दिया जाय तो ग्रहों की दृष्टि, कारक भाव, कारक ग्रह, गोचर गत ग्रह कई बार भावगत राशि व ग्रह को इस कदर प्रभावित करते हैं कि जीवन रत्न मारक प्रभाव देने लगता है ऐसी स्थितियां मनुष्य को ज्योतिष से विमुख करती है एवं ज्योतिष इससे बदनाम होता है ।अग्रवाल जी से चर्चा के दौरान हमें यह तो भरोसा हो चला कि उनके पास ज्योतिष के इस कठिन एवं नाजुक सिद्धांत में नव या अर्ध ज्ञानियों के द्धारा यदि कोई गलत सलाह दे दिया जाता है तो उनके दवारा रूद्राक्ष परीक्षण से स्थिति स्पष्ट हो जाती है ।नरेन्द्र कुमार अग्रवाल जी से रूद्राक्ष परीक्षण के उपरांत संतुष्ट व्यक्तियों की लिस्ट में अलग अलग क्षेत्र व अलग अलग व्यवसाय से संबंधित लोग हैं जिसमें से कई ज्योतिष भी हैं । हमें उनके पास से अमेंरिका में निवासरत एक अनिवासीय भारतीय का ई मेल पता भी प्राप्त हुआ है जिसे हम यहां पर दे रहे हैं साथ ही अग्रवाल जी का पता एवं फोन नम्बर भी दे रहे हैं जिससे कि आप स्वयं उनसे उपनी जिज्ञाशाओं का उत्तर प्राप्त कर सकते हैं ।Mr. Gaurang K., Sanfrancisco, USA . Mail : grkhetan@yahoo.comश्री नरेन्द्र कुमार अग्रवाल, राधा किसन माल, स्टेशन रोड, सिटी क्लब के सामने, दुर्ग छत्तीसगढफोन : ०७८८ २२११६२५, ४०१०७२३
द्वारा भेजा गया Sanjeeva Tiwari पर 4:31 अपराह्न

4 टिप्पणियाँ:
Sanjeet Tripathi कहा था...
आपने स्वयं देखा है तो हम इसे अद्भुत ही कहेंगे।शुक्रिया यह जानकारी यहां उपलब्ध करवानें के लिए।नरेन्द्र कुमार जी को शुभकामनाएं
12 मई, 2007 7:45 अपराह्न
धुरविरोधी कहा था...
आपने इस लेख की शुरूआत में बहुत अच्छी बात कही है"इस लेख का कोई वैज्ञानिक आधार नही है"मैं भी आपका समर्थन करता हूं कि इस लेख का कोई आधार नहीं है
12 मई, 2007 7:59 अपराह्न
sunita (shanoo) कहा था...
संजीव जी आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है,..वैसे मुझे ज्योतिष में विश्वास है,..यधपि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नही है ।फ़िर भी ज्योतिष को झुठलाया भी नही जा सकता।सुनीता(शानू)
12 मई, 2007 8:27 अपराह्न
Gaurang कहा था...
I will now narrate one interesting incident that happenned on my last trip to India. It was a fascinating encounter with the power of stones..I live in the US -- I have been looking to marry for a year now, and I had made a few trips to India for this purpose, but it had not been working out. This time I had again gone to India on Feb with matrimonial intent. I was going to meet a girl on Feb 10, 2007, and before that I incidentally met Mr Narendra Kumar Agarwal (from Durg, Madhya Pradesh) in Bhubhaneshwar in Orissa. It was beleived that he had abilities to decipher for any person the stones which can help him do better in his life. I requested him to test me so that it could help me in my matrimonial process for which progress had stalled. He obliged, and tested me with his procedure using Rudraksh etc, and told me that my "Guru" planet was anti -- so he recommended me to keep "Panna" stone with me in addition to the "Neelam" stone I was already wearing. He told me that without even reading my Kundali! He gave me the Panna stone to keep with me.I met the girl as planned on Feb 10, 2007. Our meeting did not work out, and I was doubtful about our prospects. I talked with Mr Narendra Agarwal on phone again, and then remembered that I had forgotten to take the Panna stone. Fortunately, the girl's father called my father, and they arranged another meeting the next day. This time I remembered to take the stone with me in my pocket. The meeting went really well, and we both agreed to our marriage! This was so wonderful after so many of my attempts at meeting girls had not worked out in the past!The marriage has now happenned already, and it went really well, and me and my wife are happily living together.I tend to think that the stone had a significant, almost magical, effect on this event. I am glad that I met Narendra Agarwal and used his testing method.. it brought about a very nice turn in my life.. I hope he keeps using his ability to help and enrich other people's lives like he did mine.- Gaurang Khetan, San Francisco, California, USA (http://gaurang.org/blog)